चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
एक माह पहले बनी सीसी सड़क पर चला बुलडोजर!
भादसोडा, । करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री साँवरिया मंदिर (प्राकट्य स्थल) में विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। महज एक माह पहले लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सीसी सड़क को अब दोबारा तोड़ा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने मंदिर समिति की कार्यप्रणाली और योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अब यहां टीन शेड लगाया जाएगा, जिसके चलते सीसी सड़क हटाई जा रही है। लेकिन स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और कई मौतबीरों का कहना है कि यदि टीन शेड ही लगाया जाना था, तो पहले समुचित योजना बनाकर निर्माण क्यों नहीं किया गया? आखिर लाखों रुपये खर्च करने के कुछ ही सप्ताह बाद उसी निर्माण को तोड़ने की नौबत क्यों आई?
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि पूर्व में जब टीन शेड लगाने की मांग की गई थी, तब समिति ने यह तर्क दिया था कि इससे मंदिर के प्राकट्य स्थल का मूल स्वरूप प्रभावित होगा। अब वही समिति टीन शेड लगाने का निर्णय कैसे और किन परिस्थितियों में ले रही है? इस बदलाव के पीछे क्या कारण हैं, इसका स्पष्ट उत्तर श्रद्धालु मांग रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान उन्हें तपती धूप में दौड़ते हुए दर्शन करने पड़े। बरसात में भी वे भीगते हुए भगवान के दर्शन करने को विवश हैं। उनका कहना है कि यदि पहले ही दूरदर्शिता के साथ टीन शेड की योजना बनाई जाती, तो न श्रद्धालुओं को परेशानी होती और न ही लाखों रुपये की लागत से बनी सीसी सड़क तोड़नी पड़ती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर में होने वाले विकास कार्य बिना दीर्घकालिक योजना के किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं के चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग हो रहा है। कई लोगों ने समिति पर मनमाने निर्णय लेने और वित्तीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग नहीं करने के आरोप भी लगाए हैं।
अब श्रद्धालुओं के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं—
एक माह पहले बनी सीसी सड़क तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या निर्माण कार्य बिना समुचित तकनीकी एवं प्रशासनिक योजना के किए जा रहे हैं?
लाखों रुपये की लागत की जवाबदेही कौन तय करेगा?
भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था होगी?
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य के सभी निर्माण कार्यों के लिए समग्र मास्टर प्लान तैयार करने की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे की राशि का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।







