बांका जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को मिशन मोड में सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन में है। जिला पदाधिकारी, बांका, अंशुल अग्रवाल ने सभी संबंधित विभागों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव, बिहार की समीक्षा बैठक के बाद आयोजित इस बैठक में डीएम ने निर्देश दिया कि 24 जुलाई 2026 तक चिन्हित सभी पंचायतों में युद्धस्तर पर टीबी स्क्रीनिंग, जांच और मरीजों की पहचान सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का काम नहीं, बल्कि सभी विभागों और आम जनता की साझा जिम्मेदारी है।
डीएम ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य के अनुसार मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग करने, संदिग्ध मरीजों की CBNAAT/TrueNat तकनीक से जांच कराने तथा सभी मरीजों का शत-प्रतिशत ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्ट (DST) कराने का निर्देश दिया।
महादलित टोलों, वृद्धजनों, छात्रावासों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा स्कूलों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर टीबी मरीजों के संपर्क में आए लोगों को जांच और टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) के लिए प्रेरित करने को कहा गया।
बैठक में शिक्षा, कल्याण, पंचायती राज और जीविका विभाग को भी स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गईं। डीएम ने कहा कि हर गतिविधि की प्रतिदिन समीक्षा होगी और निक्षय पोर्टल पर समय पर रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य होगा।
बैठक के अंत में डीएम अंशुल अग्रवाल ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी भी अधिकारी या कर्मी द्वारा अभियान के क्रियान्वयन में लापरवाही, उदासीनता या लक्ष्य प्राप्ति में शिथिलता बरती गई, तो उसके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हर दिन प्रखंडवार प्रगति की समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाएगी।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और जनभागीदारी से बांका को टीबी मुक्त जिला बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए। मनोरंजन प्रसाद, ब्यूरो चीफ, बांका।







