झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सभागार में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शशि गजराना की अध्यक्षता में ‘‘बाल विवाह मुक्त भारत‘‘ के संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश शशि गजराना ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है, दंडनीय अपराध है। जिसे रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू किया गया है। कहीं भी बाल विवाह होने जा रहा है या होने की संभावना है तो कोई भी व्यक्ति पुलिस, न्यायालय, उपखंड अधिकारी, एस.पी., चाईल्ड लाईन बाल कल्याण समिति, जिला न्यायालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं तालुका विधिक सेवा समिति को सूचना देकर बाल विवाह को रूकवा सकता है। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है। बाल विवाह को प्रोत्साहन, अनुमति देने वाले सभी दंड के भागी हैं। बाल विवाह में शामिल होने वाले पंडित, नाई, बाराती, खाना बनाने वाले, अतिथिगण, बैंड-बाजे वाले, टैंट वाले एवं बाल विवाह के लिए स्थान उपलब्ध करवाने वाले भी दंड के भागी हैं। बाल विवाह हेतु सजा 2 वर्ष का कारावास एवं एक लाख रुपए का जुर्माना है। बाल विवाह गैर जमानतीय अपराध है। उन्होंने बताया कि एक बाल दुल्हन एक वयस्क महिला की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं से दोगुना प्रभावित होती हैं। बाल विवाह मानव अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, इससे मातृ शिशु मृत्यु-दर में वृद्धि, शिक्षा का अंत, घरेलू हिंसा का जोखिम, मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। बाल विवाह की रोकथाम हेतु सचिव गजराना ने हेल्पलाईन नंबर 1098, नालसा का हेल्पलाईन नंबर 15100, महिला हेल्पलाईन नंबर 181 व बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल की जानकारी दी। उन्होंने ये भी बताया कि किसी विशेष ओदश के बाद किया गया बाल विवाह गैर कानूनी है, जिससे किसी भी तरह के अधिकार और कर्तव्य उत्पन्न नहीं होते हैं। इस सामाजिक प्रथा को समाप्त करने के लिस समाज के प्रत्येक वर्ग को एकजुट होकर काम करना होगा। झालावाड़ और भारत को बाल विवाह मुक्त बनाएं। कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थितजन को संबोधित करते हुए दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले अन्य कानूनों की भी जानकारी दी।
कार्यशाला को श्री प्रवीण पोसवाल चीफ डिफेन्स काउंसिल ने भी संबोधित किया उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों की जानकारी मिलने पर वे तुरंत कार्रवाई करेंगे। यह सिर्फ एक शपथ नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प है। उन्होंने युवाओं और समुदायों से इस मुहिम में शामिल होकर बाल विवाह रोकने के अभियान को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करेंगे, तो इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग श्री एस.के. पूनिया, महिला अधिकारिता विभाग की श्रीमती मीनाक्षी सोलंकी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि उपस्थित रहे। जिन्होंने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में कार्यशाला में उपस्थित सभी सहभागियों ने बाल विवाह रोकथाम हेतु शपथ ली।








