अमेरिका में टेक इंडस्ट्री और राजनीति की नज़दीकी एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में व्हाइट हाउस में आयोजित डिनर में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की मौजूदगी ने हलचल बढ़ा दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने जुकरबर्ग से बातचीत के दौरान मज़ाकिया अंदाज़ में कहा – “यह आपके राजनीतिक करियर की शुरुआत है।” इस पर जुकरबर्ग ने तुरंत जवाब दिया – “नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है।”
हालांकि यह बयान मज़ाक के रूप में था, लेकिन टेक जगत और राजनीति की बढ़ती दूरी को देखते हुए इस पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि क्या भविष्य में जुकरबर्ग राजनीति में कदम रख सकते हैं।
इससे पहले एलन मस्क के राजनीतिक रुझान ने भी सुर्खियाँ बटोरी थीं। अब जब ट्रंप और जुकरबर्ग एक ही मंच पर नज़र आए, तो कयासों का दौर तेज़ हो गया।
निवेश बनाम राजनीति: जुकरबर्ग ने राजनीति से दूरी बनाई है और फिलहाल उनका फोकस बड़े स्तर पर तकनीकी निवेश और AI सेक्टर पर है।
मस्क और जुकरबर्ग तुलना: मस्क के सार्वजनिक राजनीतिक रुख के बाद, जुकरबर्ग पर भी सवाल उठना लाज़मी है।
ट्रंप की रणनीति: यह मुलाक़ात दिखाती है कि टेक दिग्गजों का समर्थन पाना ट्रंप के लिए चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल मार्क जुकरबर्ग ने राजनीति में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। लेकिन टेक्नोलॉजी और सत्ता के बीच बन रहे नए समीकरण संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और गहरी हो सकती है।






