सर्दियों की रातें अक्सर गहरी नींद लेकर आती हैं, लेकिन इसी मौसम में एक ऐसी समस्या भी बढ़ जाती है, जो न सिर्फ खुद की बल्कि साथ सोने वाले की नींद भी खराब कर देती है खर्राटे। बदलता मौसम, ठंडी हवा और शरीर में होने वाले छोटे बदलाव इस परेशानी को और गंभीर बना देते हैं।
खर्राटे आते क्यों हैं?
नींद के दौरान शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं। इस प्रक्रिया में गले के पीछे मौजूद टिश्यू भी ढीले पड़ जाते हैं। जब सांस अंदर–बाहर जाती है, तो हवा इन ढीले टिश्यू से टकराती है और कंपन पैदा होता है। यही कंपन खर्राटों की आवाज बन जाता है। कुछ लोगों में गले की बनावट ऐसी होती है कि ये आवाज ज्यादा तेज और बार-बार सुनाई देती है।
सर्दियों में समस्या क्यों बढ़ जाती है?
ठंड के मौसम में हवा आमतौर पर ज्यादा सूखी होती है। ऐसी हवा सांस के जरिए अंदर जाने पर नाक और गले की नमी कम हो जाती है। इससे टिश्यू में जलन, सूजन और कंजेशन हो सकता है। नतीजतन सांस की नली और संकरी महसूस होती है, जिससे नींद के दौरान हवा का प्रवाह बाधित होता है और खर्राटे बढ़ जाते हैं।
किसे ज्यादा होता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में खर्राटों की शिकायत महिलाओं के मुकाबले ज्यादा पाई जाती है। इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त लोग, उम्रदराज व्यक्ति और एलर्जी या बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहने वाले लोग भी इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
खर्राटों को बढ़ाने वाली आम वजहें
पीठ के बल सोना, ज्यादा वजन, शराब का सेवन, देर रात भारी खाना, कम नींद लेना और धूल–मिट्टी से एलर्जी—ये सभी कारण सांस की नली को प्रभावित करते हैं और खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
खर्राटे कम करने के लिए क्या करें?
अगर खर्राटे रोज की परेशानी बनते जा रहे हैं, तो जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं। करवट लेकर सोना, वजन नियंत्रित रखना, शराब से दूरी बनाना और सोने से पहले हल्का भोजन करना असरदार उपाय माने जाते हैं। इसके साथ ही साफ तकिया इस्तेमाल करना, मुंह ढककर न सोना और पूरी नींद लेना भी जरूरी है।
ठंड में बचाव के खास उपाय
सर्दियों में कमरे की हवा में नमी बनाए रखना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्टीम लेना, नाक को साफ रखना और सर्दी-जुकाम का समय पर इलाज भी खर्राटों को कम करने में मदद करता है।कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?अगर खर्राटे बहुत तेज हों, सांस रुकने जैसा महसूस हो या दिनभर नींद और थकान बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।






