काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन महंगे करने पर बवाल ! गरमाई सियासत……

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के महीने में दर्शन-पूजन के लिए की गई शुल्क वृद्धि पर एक तरफ जहां सियासत शुरू हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ संत समाज ने इसका समर्थन किया है। अखिल भारतीय संत समाज के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने रविवार को साफ टिप्पणी और शुल्क वृद्धि का विरोध करने वालों को खरी-खरी सुनाई।

स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं का दबाव ज्यादा होता है। मंदिर न्यास ने जो शुल्क बढ़ाया है वह आम जनता के ऊपर कोई नया शुल्क नहीं है। यह पहले से लिया जाता था और स्वीकार्य था। सावन में भीड़ बढ़ेगी, कर्मचारी भी बढ़ेंगे और व्यवस्थाएं भी बढ़ानी होंगी। ऐसे में शुल्क बढ़ोतरी के विरोध का कोई सैद्धांतिक आधार नहीं है। यह विरोध तर्कसंगत नहीं है। आपकी मर्जी है और आप सुविधा लेना चाहते हैं तो शुल्क दीजिए। किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं है

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने की शुल्क वापस लेने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर शुल्क बढ़ोतरी के फैसले पर आपत्ति जताई और इस फैसले को वापस लेने की मांग की। अखिलेश यादव ने रविवार को ट्वीट किया, भाजपा सरकार से आग्रह है कि बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन पर शुल्क लगाकर गरीबों, सच्चे भक्तों व आम जनता से ‘दर्शन का अधिकार’ न छीने। भाजपा ने धर्म को व्यापार बना लिया है। निंदनीय। वहीं कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय ने भी बढ़े शुल्क के फैसले को वापस लेने की मांग की है।
व्यापारी संगठन ने भी जताई नाराजगी

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष राकेश जैन ने भी काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन के लिए बढ़ाए गए शुल्क पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि काशी विश्वनाथ धाम आस्था का प्रतीक है। शुल्क वृद्धि का व्यापार मंडल पुरजोर विरोध करेगा। कहा, मंदिर प्रशासन अमीर और गरीब में भेदभाव कर रहा है जो गलत है। शुल्क वृद्धि तत्काल वापस ली जाए। राजू बाजोरिया, विनोद अग्रवाल, राजेश यादव, अशोक पाहुजा, दिनेश चौरसिया आदि ने भी विरोध जताया। संवाद

इतना बढ़ा है शुल्क
मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि सावन में सुगम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपये, मंगला आरती के लिए एक हजार, मध्याह्न भोग आरती के लिए 500 रुपये, सप्तर्षि आरती के लिए 500, भोग आरती के लिए 500 रुपये देने होंगे।

वहीं शास्त्री से रुद्राभिषेक कराने के लिए 700, पांच शास्त्री से रुद्राभिषेक के लिए 2100 रुपये, संन्यासी भोग के लिए 4500 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए हैं। सावन के सोमवार पर सुगम दर्शन के लिए 750 रुपये, मंगला आरती के लिए 2000 रुपये, पांच शास्त्री से रुद्राभिषेक के लिए 3000 रुपये, संन्यासी भोग के लिए 7500 रुपये और शृंगार के लिए 20 हजार रुपये शुल्क देने होंगे।

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