लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
दलसिंहसराय बनेगा ग्रामीण एसपी का मुख्यालय, अपराध नियंत्रण से लेकर लंबित कांडों के अनुसंधान तक की करेंगे समीक्षा
समस्तीपुर। जिले की पुलिस व्यवस्था में नई प्रशासनिक पहल की शुरुआत हो गई है। समस्तीपुर के पहले ग्रामीण पुलिस अधीक्षक के रूप में मुकुल कुमार रंजन ने सोमवार को योगदान किया। योगदान से पूर्व सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इससे पहले वह पटना में पुलिस अधीक्षक (विधि-व्यवस्था) के पद पर कार्यरत थे। बिहार सरकार के गृह विभाग की अधिसूचना के तहत उन्हें समस्तीपुर में ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण एसपी का मुख्यालय दलसिंहसराय होगा। उनके अधीन रोसड़ा, दलसिंहसराय और पटोरी अनुमंडलों के कुल 17 थाने रहेंगे। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग की निगरानी मजबूत करना, अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाना तथा थानों के कामकाज की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करना है।
इन 17 थानों की होगी जिम्मेदारी
ग्रामीण एसपी के कार्यक्षेत्र में रोसड़ा अनुमंडल के आठ थाने—रोसड़ा, सिंघिया, विभूतिपुर, बिथान, हसनपुर, लरझाघाट, हथौड़ी और शिवाजीनगर शामिल हैं।
दलसिंहसराय अनुमंडल के पांच थाने—दलसिंहसराय, विद्यापतिनगर, उजियारपुर, अंगारघाट और घटहो उनके अधीन रहेंगे। वहीं, पटोरी अनुमंडल के चार थाने—पटोरी, मोहिउद्दीननगर, हलई और मोहनपुर भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल होंगे। इस प्रकार ग्रामीण एसपी कुल 17 थानों की पुलिसिंग की निगरानी करेंगे।
अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों की समीक्षा पर रहेगा जोर
ग्रामीण एसपी की प्रमुख जिम्मेदारियों में अपने क्षेत्र के थानों में दर्ज आपराधिक मामलों की समीक्षा, लंबित कांडों के अनुसंधान की प्रगति पर नजर रखना तथा अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की कार्रवाई का पर्यवेक्षण करना शामिल होगा। थानों की अपराध पंजी, दैनिक प्रतिवेदन और पेट्रोलिंग चार्ट जैसे अभिलेखों की निगरानी भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में हत्या, लूट, गोलीबारी, चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस की सक्रियता महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही फरार आरोपितों की गिरफ्तारी, लंबित मामलों के निष्पादन और विधि-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई भी उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।
पुलिस पदाधिकारियों पर भी रहेगी निगरानी
ग्रामीण एसपी अपने क्षेत्राधिकार में पुलिस प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर सकेंगे तथा अधीनस्थ पुलिस पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा करेंगे। निर्धारित अधिकारों के तहत अपने क्षेत्र में तैनात दारोगा तथा उनसे नीचे के पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का अधिकार भी उन्हें प्राप्त होगा। पुलिस लाइन में तैनात पदाधिकारियों के निलंबन के मामले में जिला पुलिस प्रमुख से विमर्श का प्रावधान है।
एसएसपी के नियंत्रण में करेंगे काम
नई व्यवस्था में ग्रामीण एसपी जिला पुलिस की मौजूदा प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत काम करेंगे। वह जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में रहेंगे तथा महत्वपूर्ण मामलों और संवेदनशील विषयों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को देंगे। ग्रामीण एसपी की नियुक्ति से ग्रामीण क्षेत्रों की पुलिसिंग की निगरानी के लिए अलग से वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई है।
मुकुल कुमार रंजन के योगदान के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों के 17 थानों में पुलिसिंग की गुणवत्ता, अनुसंधान की गति और अपराध नियंत्रण के प्रयासों पर नजर रहेगी। नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और मामलों के निष्पादन से स्पष्ट होगा।








