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बिहार में शिक्षक भर्ती का नया दौर: स्थानीय लोगों को मिलेगा विशेष अवसर…..

चुनाव नज़दीक आते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं को बड़ी खुशखबरी दी है। वो मांग, जिसे लेकर छात्र कई महीनों से आवाज़ उठा रहे थे – आखिरकार सरकार ने उसे सुन लिया है।

नीतीश कुमार ने बुधवार को ऐलान किया कि अब बिहार में होने वाली शिक्षक बहाली में राज्य के मूल निवासियों (डोमिसाइल) को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग को नियमों में ज़रूरी बदलाव करने का निर्देश दे दिया गया है। यह नई व्यवस्था सीधे TRE-4 (चौथी शिक्षक भर्ती परीक्षा) से लागू होगी, जो साल 2025 में आयोजित की जाएगी। इसके बाद TRE-5 2026 में होगी और उससे पहले STET परीक्षा भी करवाई जाएगी।

बिहार के युवा लंबे समय से ये मांग कर रहे थे। 1 अगस्त को पटना की सड़कों पर सैकड़ों छात्र डोमिसाइल नीति की मांग को लेकर तिरंगा लेकर पैदल मार्च पर निकले। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में निकली इस रैली को जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने रोक दिया। बैरिकेडिंग कर छात्रों को सीएम हाउस तक पहुंचने से रोका गया। इसके बावजूद छात्रों ने डटकर नारेबाज़ी की और अपनी मांगों को मजबूती से उठाया।

छात्रों का कहना है कि जब देश के दूसरे कई राज्यों में अपने स्थानीय छात्रों को नौकरी में वरीयता दी जाती है, तो बिहार के युवाओं को क्यों नज़रअंदाज़ किया जाए? छात्र नेता दिलीप ने कहा, “डोमिसाइल हमारा हक है। बाहर के राज्यों में या तो खुलकर, या फिर चालाकी से सिस्टम को ऐसा बनाया जाता है कि बाहरी छात्रों को नुकसान हो और स्थानीयों को फायदा मिले।”

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