अपने देश की आन बान शान के लिए के लिए मेजर ने दिया था सर्वोच्च बलिदान, 21 साल बाद बेटी इनायत सेना में हुई शामिल, पहनी पिता की वर्दी…

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बताते चलें, इनायत वत्स अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी हैं जो सेना में हैं. जिन्होंने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में अपने पिता मेजर नवनीत वत्स को खो दिया था। वो भी उस समय जब वो महज 3 साल की थीं। लेफ्टिनेंट नवनीत वत्स अब भारतीय सेना में शामिल हो गईं। इस दौरान उन्होंने वही वर्दी पहनी जो कभी उनके नायक पिता ने पहनी थी।भारतीय सेना में शामिल हुईं लेफ्टिनेंट इनायत वत्स पिता मेजर नवनीत वत्स की वर्दी में ही ज्वाइन की आर्मी 2003 में महज 3 साल की उम्र में इनायत ने पिता को खोया कश्मीर में आतंकी ऑपरेशन में मेजर नवनीत ने गंवाई थी जान

मेजर नवनीत वत्स ने 20 साल पहले देश की आन के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनकी बेटी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाएंगी। हालांकि, अब वो दिन आ गया जब एक बेटी ने अपने पिता की तरह ही सेना में जगह बनाने के लिए जमकर मेहनत किया। यही नहीं लगातार कोशिश के साथ पिता की शहादत के करीब 20 साल बाद लेफ्टिनेंट इनायत वत्स सेना में शामिल हो गईं। शनिवार को जब वो भारतीय सेना में ज्वाइन कर रही थीं तो बेहद दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई। दरअसल, इनायत वत्स ने सेना में ज्वाइनिंग के दौरान वही वर्दी पहनी जो कभी उनके पिता ने पहना था।

इनायत वत्स, जिनके पहले नाम का अर्थ ही होता है दयालुता। हालांकि, जब वो महज तीन साल की थी उसी समय जिंदगी ने उन्हें बड़ा दर्द दिया। उन्होंने अपने पिता सेना में मेजर नवनीत वत्स को खो दिया था। इतनी कम उम्र में पिता का साया सिर से उठने के बाद भी इनायत ने हौसला नहीं हारा। हरियाणा की रहने वाली दिल्ली से ग्रेजुएट इस बेटी ने पढ़ाई के साथ ही अपने पिता की राह पर चलने का फैसला कर दिया। उन्होंने तय कर लिया कि वो भी अपने पिता की तरह सेना में भर्ती होंगी। अब वो समय आ भी जब बेटी ने पिता की विरासत को साधा और उन्हीं की वर्दी पहनकर इंडियन आर्मी का हिस्सा बनीं।

लेफ्टिनेंट इनायत वत्स के पिता मेजर नवनीत वत्स ने साल 2003 में अपनी जान गंवाई थी। वो कश्मीर में एक आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल थे। इनायत सेना में अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। उनके नाना भी आर्मी में कर्नल रैंक पर थे। पंचकुला की रहने वाली इनायत वत्स, अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। महज तीन साल की उम्र में उनके पिता ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने जिस वीरता का परिचय दिया उसके लिए नवनीत वत्स को मरणोपरांत सेना पदक से सम्मानित किया गया था।

इनायत वत्स अब भारतीय सेना में शामिल हो गई हैं। उन्होंने सेना ज्वाइन के खास मौके पर अपने पिता की ही वर्दी पहनकर और इस दिन को और खास बना दिया। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में शिरकत किया था। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएट इनायत ने डीयू के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। शहीद के परिजनों को लेकर हरियाणा सरकार की पॉलिसी के तहत उन्हें एक गजेटेड पोस्ट का ऑफर मिला था, हालांकि इनायत का प्लान कुछ और ही था।

अपने पिता नवनीत वत्स को आदर्श मानने वाली इनायत का एक ही लक्ष्य था सेना में भर्ती, आखिरकार उन्होंने इसे हासिल भी कर लिया। हालांकि उनकी मां शिवानी ने बेटी के फैसलों को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर की थी, बावजूद इसके उन्होंने इनायत के फैसले को पूरा सपोर्ट भी किया। उन्होंने कहा कि वह एक बहादुर की बेटी हैं। जब इनायत ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, तो सभी ने सोचा कि वह राज्य सरकार की ओर से दी गई नौकरी ही ज्वाइन करेंगी। हालांकि, वह एक शहीद की बेटी हैं और उनके लिए सेना में शामिल होना स्वाभाविक और उनके लिए गर्व का पल था।

शिवानी 27 साल की थीं और उनकी शादी को केवल चार साल ही हुए थे जब उनके पति हमेशा के लिए उनसे दूर चले गए। वो पंचकूला में पास के ही एख चंडीमंदिर में आर्मी पब्लिक स्कूल में टीचर थीं। उन्होंने बताया कि इनायत ने एक बार मुझसे पूछा था कि अगर मैं लड़का होती तो तुम क्या करतीं? उस समय मैंने उससे कहा था कि मैं उसे एनडीए या आईएमए में शामिल होने के लिए कहती। मुझे खुशी है कि मेरी बेटी ने इस बात को स्वीकार किया और अब वो सेना में शामिल हो गई हैं। इनायत वत्स की मां शिवानी ने भावुक होते हुए कहा,”एक बहादुर की बेटी है, मुझे खुशी है कि आरामदायक जीवन बिताने के ऑप्शन के बावजूद वह अपने पिता की राह पर आर्मी ज्वाइन किया.

रिपोर्ट:-अमित कुमार सिन्हा (रांची)

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