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“जान पहले या ज्ञान? 2256 खस्ताहाल स्कूलों में लटकी बच्चों की पढ़ाई”

पहले जान या फिर ज्ञान? राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वो अब अस्पताल के बेड पर ज़िंदगी से जूझ रहे हैं। हादसे के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान आया – ‘पहले जान, फिर ज्ञान’। उनका कहना है कि सरकार की पहली प्राथमिकता बच्चों की जान बचाना है, शिक्षा बाद में। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या इतनी बड़ी कीमत चुकाने के बाद ही सिस्टम जागेगा?

इस हादसे ने एक और सच्चाई सामने ला दी – राजस्थान में 2256 स्कूल जर्जर हालत में हैं। ये संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि सर्वे अभी जारी है। अफसोस की बात ये है कि स्कूलों की हालत की जानकारी समय पर दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सरकार विकल्प की बात कर रही है – कहीं धर्मशाला में क्लास लगेगी तो कहीं किसी खाली इमारत में। लेकिन क्या यह बच्चों के भविष्य के साथ समझौता नहीं? हादसे के बाद सिर्फ जांच और मुआवज़ा नहीं, जिम्मेदारी और जवाबदेही भी जरूरी है।

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