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लाखों अकीदतमंदों ने अपने पेशवा आला हज़रत की बारगाह में किया खिराज पेश

बरेली। उर्स-ए-रज़वी के आखिरी दिन आज लाखों सुन्नी-सूफ़ी अकीदतमंदों ने अपने पेशवा अपने मोहसिन;आला हज़रत की बारगाह में खिराज पेश किया। उर्स में देश विदेश के सज्जादगान व मशहूर नामवर उलेमा ने मज़हब इस्लाम,पैगंबर-ए-इस्लाम की तालीमात,मसलक-ए-आला हज़रत के मिशन पर चर्चा की। सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में हुए। सुबह 8 महफिल का आगाज़ तिलावत-ए- कुरान से किया गया। दोपहर ठीक 2 बजकर 38 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी रज़ा-ए- रसूल,मौलाना बशीर उल क़ादरी,मुफ्ती ज़ईम रज़ा ने पढ़ी। इसके बाद अपने वतन हिंदुस्तान समेत दुनिया में अमन-ओ-सुकून कौम-ओ- मिल्लत की खुसूसी दुआ सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां व नबीरे आला हज़रत हज़रत मौलाना तौसीफ रज़ा ने की।
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह 08 बजे से उलेमा की तकरीर का सिलसिला शुरू हुआ जो 2 बजकर 38 मिनट तक चलता रहा। नबीरे आला हज़रत मुफ्ती अर्सलान रज़ा क़ादरी(अर्सलान मियां) ने अपने खिताब में कहा कि बरेली से दीन और सुन्नियत का 1246 से आला हज़रत के दादा मुफ्ती रज़ा अली खान के वक्त से चल रहा है जिसे आज भी जारी है। मसलक ए आला हज़रत कोई नया मसलक नहीं बल्कि 1500 सौ साल पहले का दीन ही मसलक ए आला हज़रत है। मसलक ए आला हज़रत अंधभक्ति नहीं बल्कि ज़िंदा हकीकत का नाम मसलक ए आला हज़रत है। अहले सुन्नत का पैगाम मोहबत है उसे आम करो। साथ ही जंग जब अपनो से हो हार जाना ही बेहतर है। दुनिया भर के बरेलवी उलेमा सुन्नियत की खेती को हरा भरा करने का काम करे। नबीरे आला हज़रत मुफ्ती फैज़ मियां ने भी अपने खिताब में कहा कि आला हज़रत का खानदान पिछली दो सदी से मज़हब ओ मसलक की खिदमत को अंजाम दे रहा है। आला हज़रत के दादा मुफ्ती रज़ा अली खान ने अंग्रेजों के खिलाफ फ़तवा दिया। आला हज़रत ने जो दीन के काम किए उसे परवान हुज्जातुल इस्लाम,मुफ्ती आज़म ए हिन्द और उनकी आल ने आगे बढ़ाया। आठ पढ़ियो से हमारा खानदान आज भी दुनिया भर सुन्नियत के मिशन पर काम कर रही है। कारी यूसुफ रज़ा संभली ने उर्स का संचालन करते हुए कहा कि मुसलमान इस्लामी कानून के साथ अपने मुल्क के भी सच्चे वफादार रहते हुए इस्लाम की सही तस्वीर व नबी ए करीम की तालीमात को आम करने का काम उलेमा करे। गाना बजाना और डीजे से बचे।
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अपने खिताब में कहा कि जश्न ए ईद मिलादुन्नबी करीब है दुनियाभर के मुसलमान अल्लाह के रसूल की पैदाइश का जश्न मनाएंगें। मुसलमान अपने घरों में इस्लामी झंडे लगाएंगे और लगाने भी चाहिए। लेकिन पिछले साल कुछ लोगों के ऊपर अंजाने में मुकदमे हुए जिसका कारण था हरे झंडे जो इस्लामी होते है उनको जी
गलत फहमी में पाकिस्तानी झंडे समझ लिये गए। वही कुछ हरे झंडों में तलवार बनी है ये झंडा सऊदी अरब झंडा है। तिरंगा झंडा के साथ भी इसको तैयार करने
वाले रद्दोबदल कर देते है जबकि तिरंगे झंडे के साथ किसी भी तरह की रद्दोबदल भारतीय कानूनी इजाज़त नहीं देता है ये कानूनी जुर्म है। ज़रूरी नहीं
है कि हरा झंडा ही लगाया जाए से
सफेद, काला या सुनहरा झंडा भी लगा सकते है। पाकिस्तान के झंडे से मिलते जुलते झंडे लगाने से बचे। चुनावी माहौल है सियासी पार्टियों से होशियार रहते है हिंदू मुस्लिम आपसी सौहार्द के साथ मुल्क की तरक्की खुशहाली और अपने देश को विश्व गुरु बनाने के लिए काम करे। ये काम उलेमा अपने अपने इलाको में लोगों को बताए कि सभी लोग शरई दायरे में रहकर एक दूसरे के कार्यक्रम में शामिल हो। देश का मुस्लमान कभी किसी दूसरे मज़हब के लोगों से टकराव नहीं चाहता। मुफ्ती आकिल रज़वी द्वारा लिखी हुई किताब सही बुखारी का उर्दू में अनुवाद इमदादुल कारी की ग्यारहवीं जिल्द का विमोचन दरगाह प्रमुख ने किया। इस मौके पर मुफ़्ती अकिल रज़वी ने कहा कि बरेली सिर्फ बरेलवियों का ही मरकज नहीं बल्कि सभी सुन्नी खानकाहों का जो हक पर है उनका भी मरकज है। तमाम खानकाहे जो सुन्नियत का काम कर रही है वो हमारी है। मुफ़्ती इमरान हनफी ने कहा कि आला हज़रत की इल्मी कारनामों को दुनिया आज देखकर हैरान है। आपके इल्म का डंका दुनिया भर में बज रहा है।
अल्लामा तौसीफ रज़ा मिस्बाही व मौलाना साजिद रज़ा ने मुल्क की आजादी के बाद से अब तक मुस्लमान किया वजह है कि वो शैक्षिक,आर्थिक,सामाजिक क्षेत्र में क्यों पिछड़ा है। जिसकी बड़ी वजह हम लोगों में शिक्षा की बड़ी कमी है। हमें अगर सुरक्षा चाहिए तो शिक्षा हासिल करनी होगी। बच्चों के हाथ में कलम दे दो निवाले कम खाए लेकिन अपने बच्चों को तालीम जरूर दे। अपने बच्चों को आईएएस,आईपीएस,इंजीनीयर, डाक्टर बनाए। मौलाना जाहिद रज़ा कहा कि अमीर मुसलमानों से कहा कि तुम्हारे मॉल पर गरीबों का भी हक नबी ए करीम की जिंदगी से सीख लेते हुए अपने मॉल को जरूरतमंदों में खर्च करे यही दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन का पैगाम है। मुफ्ती ज़ईम रज़ा आला हज़रत ने हमें इश्क के रसूल का जो पाठ पढ़ाया उस पर सख्ती से कायम रहे। नमाज़ की पाबंदी करे। कश्मीर से आए मौलाना फारूक नक्शबंदी और मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने सोशल मीडिया और उसके इस्तेमाल पर तकरीर करते हुए कहा कि दीन ट्यूबरो से नहीं बल्कि आला हज़रत और सुन्नी उलेमा की किताबों से सीखे। नमाज़ की पाबंदी,बिना दहेज़ की शादी करने पर ज़ोर दिया। आगे कहा कि
आला हज़रत वाले फितने फसाद नहीं बल्कि अमन ओ सुकून में या यकीन रखते है। मौलाना ज़िक्रुल्लाह ने अपने पैगाम में में के कहा कि अपने मां और बाप की खिदमत करो अगर वो बीमार हो तो उनकी खिदमत करो। उनकी फर्माबरदारी हम पर लाज़िम है। मां बाप अगर नाराज़ तो हमारा खुदा हमसे कभी राज़ी नहीं होगा।
मुफ्ती अय्यूब खान ने कहा कि लाउडस्पीकर से नमाज़ पर मुफ्ती-ए-आज़म का फतवा है इससे बचने और कुर्सी पर नमाज़ पढ़ने से मना फरमाया कहा कि खड़े नहीं हो सकते तो बैठकर पढ़ ले। मुफ्ती जिलानी ने कहा कि आज मुसलमानों में बेदारी की ज़रूरत है। मस्जिदों पर बुलडोज़र चलाकर उनको शहीद किया जा रहा है। हमारे एक उलेमा 4 साल से और आला हज़रत
का शहज़ादा पिछले एक साल से
जेल में बंद है और लोग अब भी संजीदा नहीं है। बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा
देने वाले मदरसे से पढ़ने वाली अल्लामा फैजले हक खैराबादी थे। कारी इकबाल मुरादाबादी ने अपने खिताब में डीजे और शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर चर्चा की। वही बीच बीच में नात ओ मनकबत भी गूंजती रहे जिसमें मुख्य रूप से नबीरे आला हज़रत सुल्तान रज़ा खान,नूरी मियां(मुंबई) ने मनकबत पेश कर खूब वाहवाही लूटी। महशर बरेलवी,सैफुल्लाह सुल्तानी,आसिफ रज़ा वास्ती,मौलाना अर्सलान रज़ा,मौलाना ताहिर रज़ा रामपुरी,मौलाना आरिफ अशरफी,कारी रज़ा ए रसूल,मोअज्जम सुब्हानी,मौलाना अनीस-उर-रहमान ने नात मनकबत का नज़राना पेश किया। इस मौके खानकाहे तहसीनिया के सज्जादानशीन हज़रत मौलाना हस्सान रज़ा खान,नबीरे आला हज़रत,अहसान रज़ा,शीरान रज़ा खान,मोअज्जम रज़ा खान,जुबैर रज़ा खान,सय्यद मुस्तफा मियां,मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज नूर अहमद अजहरी,दरगाह शाहदाना वली के प्रबंधक अब्दुल वाजिद नूरी के अलावा बड़ी संख्या में उलेमा और शोहरा शामिल रहे।
उर्स की व्यवस्था राशिद अली खान,हाजी जावेद खान,शाहिद नूरी,अजमल नूरी,परवेज़
नूरी,नासिर कुरैशी औरंगजेब नूरी,ताहिर अल्वी, मंज़ूर रज़ा,मुजाहिद बेग,जुबैर रज़ा,शान रज़ा,इशरत नूरी,अब्दुल माजिद,सय्यद माजिद,युनुस गद्दी,इरशाद रज़ा,आसिफ रज़ा,सऊद रज़ा,सुहैल रज़ा,रोमान खान,हाजी अब्बास नूरी,हाजी शरिक नूरी,सय्यद एजाज़,अब्दुल माजिद,अशमीर रज़ा,साकिब रज़ा,मोहसिन रज़ा,रेहान कुरैशी, जुनैद मिर्ज़ा, ग़ज़ाली रज़ा,सबलू अल्वी,सय्यद जुल्फी,नफीस खान,नावेद रज़ा,जावेद खान,साजिद नूरी,हाजी फय्याज,हाजी अज़हर बेग,हाजी शकील नूरी, नईम रज़ा,मोहसिन रज़ा,अकील नूरी,हस्सान रज़ा,हसन बरेलवी,समी रज़ा,गौहर खान,अजमल रज़ा,शरिक बरकाती,मुस्तकीम नूरी,फारूक खान,सरताज बाबा,सय्यद फरहत,युनुस साबरी,खालिद नूरी,आदिल रज़ा,शाद रज़ा, अरवाज़ रज़ा,हसीन खान,सैफ खान,नाजिम रज़ा आदि ने संभाली। उर्स सकुशल सम्पन्न होने के बाद दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां व सय्यद आसिफ मियां ने ज़िला प्रशासन,पुलिस प्रशासन,रेलवे,नगर निगम,मीडिया, नागरिक सुरक्षा संगठन,सभी लंगर व सबील कमेटियों,रजाकारों, टीटीएस वालंटियर्स,रज़ा फोर्स का शुक्रिया अदा किया।

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