इजराइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर एक महीने से लगातार हो रहे हमले के बाद भी अभी तक युद्ध ख़त्म नहीं हुआ है ,साथ ही ईरान के द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट उत्पन हो गया है। यूरोप से लेकर एशिया तक कई देशों को होर्मुज बंद होने की वजह से अपनी तेल-गैस की जरूरतों को संभालने में दिक्कत हो रही है। वहीं जो देश तेल-गैस सप्लाई करते हैं, उन्हें भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इजराइल ,अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 2 अप्रैल को एक बयान दिया जब तक वह ईरान में अपने लक्ष्य को पूरा नहीं करता है तब तक यह युद्ध जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस काम में दो से तीन हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर खाड़ी देश—जैसे संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत—इसके आगे भी बंद रहने की आशंका को देखते हुए तेल-गैस पहुंचाने के वैकल्पिक इंतजामों पर विचार कर रहे हैं। जिन योजनाओं पर चर्चा हो रही है, उनमें एक योजना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी प्रस्तावित की गई थी, हालांकि इस पर लंबे समय से काम अटका हुआ है।होर्मुज जलडमरूमध्य की सबसे बड़ी वजह यही है कि युद्ध की वजह से यह अहम समुद्री मार्ग बेहद संवेदनशील हो गया है, यहां ईरान न सिर्फ खाड़ी देशों के तेल-गैस और सप्लाई से जुड़े टैंकरों और जहाजों को निशाना बना रहा है, बल्कि अपनी मर्जी से ही कुछ देशों को यहां से गुजरने की इजाजत दे रहा है। इसके कारण खाड़ी देशों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसका असर यह रहा की यह से गुजरने वाले यातायात में 95 %की गिरावट आयी है ,साथ ही यहा से गुजरने वाले जहाज को तेहरान की पहले मंजूरी लेनी पड़ती है ,जिससे खाड़ी के देशो को भारी मात्रा में नुक़सान हो रहा है.शांति के समय दुनिया का करीब 20% तेल-गैस होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। यहां रुकावट आने से सप्लाई प्रभावित हुई है, तेल की कीमतों, शिपिंग और बीमा लागत में तेज बढ़ोतरी हुई है और कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है।
साथ ही खाड़ी के देशो को अब समझ आ गया है की एक ही रास्ते पर निर्भर रहा सही नहीं है इसलिए वे पाइपलाइन, रेलवे और सड़कों का वैकल्पिक नेटवर्क बनाने पर विचार कर रहे हैं।इन विकल्पों में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का विस्तार, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर , यूएई की फुजैरह पाइपलाइन, इराक-तुर्की मार्ग और लाल सागर व ओमान के बंदरगाहों तक नए रास्ते शामिल हैं।हालांकि, ये परियोजनाएं काफी महंगी और जटिल हैं, जिनमें सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियां भी हैं। फिर भी, इनसे भारत, खाड़ी देशों और यूरोप को लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा और स्थिर सप्लाई का फायदा मिल सकता है।
रिपोर्ट -किरन






