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चित्रकूट- नैनो उर्वरक ही हो सकते हैं रासायनिक उर्वरकों के विकल्प, उप क्षेत्र प्रबंधक राजवीर सिंह

चित्रकूट – उप क्षेत्र प्रबंधक राजवीर सिंह द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि नैनो उर्वरक ही हो सकती है रासायनिक उर्वरकों का विकल्प -72 वां अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह (14-20 नवम्बर) अन्तर्गत जनपद चित्रकूट में कृषि विभाग के फील्ड कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए एक दिवसीय नेना उर्वरक उपयोग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें जनपद के कृषि विभाग के फील्ड कर्मचारियों एवं अधिकारियों को नैनों उर्वरकों के प्रयोग की विधि, सावधानी एवं इनसे होने वाले लाभों की सुक्ष्म तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई गई जिससे वह अपने क्षेत्र में किसानों का इस संबंध में जागरूक कर सकें।
नैनो उर्वरक ही हैं जो की रासायनिक उर्वरकों का विकल्प हो सकते हैं एवं धरती माता को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं, इस अवसर पर इफको प्रयागराज से पधारे श्री अक्षय कुमार पांडे जी ने प्रशिक्षुओं को नैनो उर्वरक की आवश्यकता एवं लाभ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से खेती की लागत कम तो होती ही है साथ ही भारत सरकार को उर्वरक सब्सिडी के मद में होने वाली धनराशि की भी बचत होती है। उप कृषि निदेशक राजकुमार ने सभी प्रशिक्षुओं को निर्देशित किया कि वह अपने-अपने क्षेत्र में नैना उर्वरक आधारित प्रदर्शन लगाय एवं प्रदर्शनों की प्रगति किसानों को दिखाते हुए प्रचार-प्रसार में सहयोग करें। इस अवसर पर पाही ग्राम के कृषक रमाशंकर मिश्र को उप कृषि निदेशक के द्वारा नैनो डीएपी, नेनो यूरिया, नैनो जिंक एवं सागरिका उपहार स्वरूप दी गई जिसे प्रदर्शन के रूप में लगाया जाएगा। इफको के उप क्षेत्र प्रबंधक चित्रकूट राजवीर सिंह ने नैनो उर्वरक उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी एवं प्रयोग के समय ध्यान रखने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया। नैनो डीएपी से किसी भी फसल के बीज उपचार करने पर 50% डीएपी की बचत हाती है एवं उत्पादन में 10-15% की बढ़ोत्तरी हाती है। आलू की फसल में बुवाई के लिए आलू के कंद का उपचार प्रति लीटर पानी में 10 मिलीलीटर नैना डीएपी मिलाकर आलू के कंद पर छिड़काव किया जाता है एवं कंद को 30 मिनट छाया में सुखाकर बुवाई की जाती है।
अन्य सभी फसलों में भी 5 से 10 मिली लीटर नैनो डीएपी प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बीज शोधन किया जाता है एवं बुवाई के 30 से 35 दिन पश्चात नैनो डीएपी की 500 मिलीलीटर मात्रा व नैनो यूरिया 500 मिलीलीटर का प्रति एकड़ क्षेत्रफल में 120 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए ।
नेनो डीएपी का प्रयोग करने से उत्पादित फसल की गुणवत्ता में वृद्धि होती हे एवं एकरूपता रहती है, कीड़े बीमारी कम लगते हैं एवं खरपतवार की भी समस्या से निजात मिलती है। नैनो उर्वरकों पर सरकार को सब्सिडी मद में कोई भी व्यय नहीं करना होता है जबकि पारंपरिक दानेदार खाद में सब्सिडी गढ़ में अत्यधिक धनराशि व्यय होती है।
फसल पारंपरिक दानेदार डीएपी का उपयोग 15 से 20% ही कर पाती है जबकि नैना डीएपी की उपयोग क्षमता 90% से भी अधिक है। यदि किसान भाई नैनो डीएपी, नैनो यूरिया का उपयोग दानेदार डीएपीव यूरिया के साथ करते हैं तो देश की रासायनिक उर्वरकों की जरूरत को पूरा करने में भारत सरकार को आसानी होगी एवं विदेश से डीएपी के आयात में कमी आएगी जिससे देश आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा, पर्यावरण स्वच्छ होगा, मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा एवं खाद्य पदार्थ भी पौष्टिक होंगे।

रिपोर्ट संजय मिश्रा

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