मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय कार्यालय पर बनी रणनीति, गन्ना मूल्य 500 रुपये और किसान पेंशन समेत कई मांगों को लेकर आर-पार के मूड में संगठन
● देहरादून प्रशासन को दी चेतावनी, समस्याओं का समाधान न होने तक जारी रहेगा आंदोलन
जनवाणी संवाददाता | मुजफ्फरनगर
उत्तराखंड के किसानों की ज्वलंत समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को संगठन के राष्ट्रीय कार्यालय पर आयोजित अहम बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने 7 दिनों के भीतर किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की, तो 13 दिसंबर को संगठन मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव करेगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए भाकियू तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लगातार किसानों की अनदेखी कर रही है। सरकारी तंत्र का कोई भी लाभ धरातल पर किसानों तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे कृषक समाज में गहरा रोष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन ने अपनी मांगों को लेकर एक 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया है। यह प्रतिनिधिमंडल अगले 7 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याओं पर सीधा संवाद करना चाहता है, लेकिन प्रशासन ने अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है।
गन्ना मूल्य 500 रुपये और पेंशन की उठी मांग
संजीव तोमर ने मांगों को विस्तार से रखते हुए कहा कि देहरादून क्षेत्र के किसानों के लिए नए पेराई सत्र में गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। इसके साथ ही इकबालपुर चीनी मिल पर लंबित किसानों के बकाया भुगतान को तत्काल जारी करने की मांग की गई। संगठन ने 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके किसानों के लिए जीवनयापन हेतु 10,000 रुपये प्रति माह की सम्मानजनक पेंशन की भी वकालत की है।
पहाड़ से पलायन और कनेक्टिविटी का मुद्दा
पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए संगठन ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया। मांग की गई कि पलायन रोकने के लिए हर पहाड़ी गांव में सड़क, पानी और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके अलावा किसानों को कृषि यंत्र मुफ्त उपलब्ध कराने और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड पर कार्य करने की आवश्यकता बताई गई।
सिंचाई, टोल मुक्ति और नागरिकता पर जोर
बैठक में सिंचाई विभाग की जर्जर नहरों की मरम्मत और सफाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। संगठन ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर किसानों के सभी वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग की। साथ ही हमूद नगर रोड (देहरादून) पर बिना रूट परमिट के खनन सामग्री ढोने वाले भारी वाहनों की अवैध आवाजाही पर तत्काल रोक लगाने को कहा गया।
एक महत्वपूर्ण मांग रखते हुए संजीव तोमर ने कहा कि जो व्यक्ति उत्तराखंड में 10 वर्षों से निवास कर रहा है, उसे राज्य का नागरिक माना जाए। इसके अतिरिक्त छोटे किसानों के लिए विशेष ऋण सुविधा, खेत से मंडी तक मुफ्त ट्रांसपोर्ट और बाढ़ राहत व आपदा प्रबंधन के लिए एक पूर्ण मंत्रालय की स्थापना की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
प्रशासन की होगी जिम्मेदारी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में वार्ता नहीं होती है, तो 13 दिसंबर को होने वाले कूच और घेराव की संपूर्ण जिम्मेदारी देहरादून प्रशासन की होगी। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
ये रहे मौजूद
बैठक में मुख्य रूप से पवन त्यागी, श्रवण त्यागी, हबीब ठाकुर, महबूब बालियान, राजबीर चौधरी, रिहान तोमर, अंकित गुर्जर, जितेंद्र सैनी, निखिल चौधरी, सोनू चौधरी, हसीर, चंदन त्यागी, हनी बालियान, जमीर अहमद, नौशाद, आकिल, इरशाद, विनीत त्यागी, आसिफ, अमजद, चांद, मोमिन, राजन चौधरी, नसीम, सुभान, इंशाद, सुमित उपाध्याय, गुलबहार, हुकुमदिन, शौकीन, सलमान, सऊद, संजय त्यागी, भूरा हाथी, अजय त्यागी, जाहिद, नईम, नितिन शर्मा, मेहरबान, शाहवेज, महबूब पुरकाजी, मोनू धीमान, राजू, शानू पहलवान, सुभाष, आजम, सुनील राठी, फिरोज, अरशद आदि उपस्थित रहे।






