राज्यसभा में उस वक्त सियासी तापमान बढ़ गया, जब आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को बोलने की अनुमति नहीं मिली। इस पर नाराज़गी जाहिर करते हुए उन्होंने सदन के बाहर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा— “मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।”
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखने से रोका गया। उनका कहना था कि विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना उनका कर्तव्य है और अगर उन्हें संसद के अंदर बोलने नहीं दिया जाएगा, तो वह बाहर आकर अपनी बात मजबूती से रखेंगे।
आप सांसद के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की आवाज़ दबाने का मामला बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही नियमों के तहत चलती है और हर सदस्य को उन्हीं नियमों का पालन करना होता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में अभिव्यक्ति की आज़ादी और नियमों के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का पलटवार कहा खामोश….






