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नेतनयाहू को जाना होगा जेल? इजराइल की सत्ता में होने जा रहा बड़ा उलटफेर, जानिए पूरा मामला…

नेतन्याहू को जाना पड़ सकता है जेल? गादी आइजनकोट के प्रधानमंत्री बनने की राह साफ, अरब पार्टियों की भूमिका से बदल सकती है इजराइल की राजनीति

इजराइल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 8 नवंबर को देश के अगले प्रधानमंत्री को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को अरब पार्टियों का समर्थन मिलने के बाद उनके पक्ष में 67 सांसदों का आंकड़ा पहुंच गया है, जो बहुमत के लिए जरूरी संख्या से छह अधिक है। ऐसे में राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

दूसरी ओर, लंबे समय से भ्रष्टाचार के मुकदमों का सामना कर रहे मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सत्ता से बाहर होने की स्थिति में उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों पर भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, अभी तक अदालत ने उन्हें किसी भी मामले में दोषी करार नहीं दिया है।

नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के तीन बड़े मामले

बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। नवंबर 2019 में उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात से जुड़े तीन मामलों में आरोप लगाए गए थे। इन मामलों को केस-1000, केस-2000 और केस-4000 के नाम से जाना जाता है।

मई 2020 से जेरूसलम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई चल रही है। आरोप साबित होने की स्थिति में नेतन्याहू को गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

केस-1000: महंगे उपहार लेने का आरोप

इस मामले में आरोप है कि नेतन्याहू ने हॉलीवुड फिल्म निर्माता और पूर्व मोसाद एजेंट अरनॉन मिल्चन तथा ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी जेम्स पैकर से महंगे उपहार स्वीकार किए।

आरोपों के मुताबिक, मिल्चन ने नेतन्याहू को सिगार और उनकी पत्नी सारा के लिए लगभग 7 लाख शेकेल की शैंपेन दी थी। इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में करीब 2 करोड़ रुपये बताई गई थी। बदले में नेतन्याहू पर मिल्चन को टैक्स संबंधी लाभ पहुंचाने का आरोप है।

केस-2000: मीडिया कवरेज के बदले राजनीतिक फायदा

इस मामले में नेतन्याहू पर इजराइली अखबार ‘येदियोत अहरोनोत’ के मालिक अरनॉन मोजेस के साथ कथित समझौते की कोशिश करने का आरोप है।

आरोप है कि 2008 से 2014 के बीच नेतन्याहू ने अपने पक्ष में बेहतर मीडिया कवरेज हासिल करने के बदले ऐसा कानून बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिससे प्रतिद्वंद्वी अखबार ‘इजराइल हायोम’ का सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता था।

इस मामले से जुड़ी एक रिकॉर्डिंग भी सामने आई थी, जिसमें मोजेस नेतन्याहू से सत्ता में बने रहने में मदद करने की बात करते सुनाई देते हैं। हालांकि, नेतन्याहू ने इन आरोपों को रिश्वतखोरी की पेशकश मानने से इनकार किया है।

केस-4000: टेलीकॉम कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

तीसरे मामले में नेतन्याहू पर आरोप है कि उन्होंने निजी फायदे के बदले इजराइली टेलीकॉम कंपनी बेजेक को सरकारी स्तर पर नियामकीय लाभ पहुंचाया।

आरोपों के अनुसार, 2015 में बेजेक और सैटेलाइट कंपनी यस के बीच विलय को मंजूरी देने में नेतन्याहू की भूमिका रही। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इस फैसले से संबंधित पक्षों को आर्थिक लाभ हुआ।

गाजा युद्ध के बीच नेतन्याहू के मुकदमों पर क्यों पड़ा असर?

नेतन्याहू के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई कई बार अलग-अलग कारणों से प्रभावित हुई है।

अप्रैल 2022 तक इस मामले में गवाहों की गवाही दर्ज की जा चुकी थी। इसी दौरान पुलिस पर आरोप लगे कि उसने नेतन्याहू के निर्देश पर सरकारी गवाह की जासूसी की थी।

इसके बाद 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और गाजा में शुरू हुई इजराइली सैन्य कार्रवाई ने देश की राजनीति का केंद्र बदल दिया। युद्ध के कारण नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे मुकदमों की चर्चा भी काफी हद तक पीछे चली गई।

विपक्षी दलों और अरब पार्टियों ने नेतन्याहू की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए युद्ध का इस्तेमाल किया। इन राजनीतिक आरोपों के साथ गाजा में बड़े पैमाने पर फिलिस्तीनियों की मौत का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

इजराइल में मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी को सामान्य तौर पर सप्ताह में कम से कम तीन दिन अदालत में उपस्थित होना पड़ता है। इस वजह से प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नेतन्याहू के लिए मुकदमे की प्रक्रिया राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनी रही।

नवंबर 2024 में नेतन्याहू ने सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। मार्च 2025 में शिन बेट के तत्कालीन प्रमुख रोनेन बार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कई बार ऐसी सुरक्षा रिपोर्ट जारी करने को कहा था, जिससे यह साबित किया जा सके कि मुकदमे में गवाही देने के लिए अदालत जाना उनके लिए सुरक्षित नहीं है।

10 दिसंबर 2024 को नेतन्याहू पहली बार इस मामले में अदालत के सामने पेश हुए। इसके बाद उनकी सर्जरी के कारण आगे की सुनवाई प्रभावित हुई। 24 जून 2026 तक वह अपनी अंतिम गवाही भी दे चुके थे।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पूछताछ के दौरान नेतन्याहू ने 1,778 बार पुलिस से कहा कि उन्हें संबंधित घटनाएं याद नहीं हैं।

नेतन्याहू ने राष्ट्रपति से मांगी माफी, लेकिन शर्तें बन सकती हैं मुश्किल

नेतन्याहू के खिलाफ मुकदमों का फैसला अभी नहीं आया है। इस बीच उन्हें कानूनी राहत दिलाने के लिए माफी की मांग भी सामने आई है।

नवंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से नेतन्याहू को माफी देने की अपील की थी। ट्रम्प ने नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे मुकदमों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उनकी आलोचना की थी।

इसके बाद 30 नवंबर को नेतन्याहू ने राष्ट्रपति हर्जोग को 11 पन्नों का कानूनी अनुरोध भेजकर माफी की मांग की।

हालांकि, इजराइल में सजा सुनाए जाने से पहले किसी नेता को राष्ट्रपति की ओर से माफी दिए जाने की यह मांग असामान्य मानी जा रही है।

अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कहा गया था कि माफी के अनुरोध पर विचार करने से पहले दोनों पक्षों के बीच प्ली बार्गेन यानी आपराधिक आरोप स्वीकार करने के बदले कम सजा पर समझौते की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए।

नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक मुश्किल यह है कि अपराध स्वीकार करने और माफी की प्रक्रिया में शामिल होने से उन्हें राजनीति से सात साल तक दूर रहना पड़ सकता है। हालांकि, नेतन्याहू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह राजनीति छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।

क्या सत्ता से हटने के बाद भी नेतन्याहू सांसद बने रहेंगे?

प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नेतन्याहू की राजनीतिक भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होगी। वह संसद के सदस्य बने रह सकते हैं। इजराइल में सांसदों को संसदीय कार्यों के दौरान कुछ कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक दबाव में कार्रवाई से बचाव करना है।

हालांकि, इस संरक्षण का अर्थ यह नहीं है कि किसी सांसद को हर तरह के आपराधिक मुकदमे से पूरी तरह छूट मिल जाती है।

विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू को 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकार में आने पर इस हमले की जांच कराने की बात भी कही है।

इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के मामले भी रहे चर्चा में

इजराइल में शीर्ष पदों पर रहे नेताओं को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट ने 2009 में भ्रष्टाचार से जुड़े विवादों के बीच इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्हें 19 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।

इसी तरह पूर्व राष्ट्रपति मोशे कात्साव पर 2007 में बलात्कार के आरोप लगे थे। शुरुआत में उन्होंने प्ली-डील पर सहमति जताई, लेकिन बाद में इससे पीछे हट गए। इसके बाद उनके खिलाफ दोबारा मुकदमा चला और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई।

अरब पार्टियों के समर्थन से इजराइल की राजनीति में क्या बदल सकता है?

गादी आइजनकोट को अरब पार्टियों का समर्थन मिलना इजराइल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि इस समर्थन के आधार पर नई सरकार बनती है, तो अरब राजनीतिक दलों की भूमिका पहले से अधिक प्रभावशाली हो सकती है।

इसका असर सरकार की नीतियों, अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों और फिलिस्तीन के प्रति इजराइल के राजनीतिक दृष्टिकोण पर पड़ सकता है।

हालांकि, केवल समर्थन मिलने से यह तय नहीं हो जाता कि अरब पार्टियां सरकार में मंत्री पद भी हासिल करेंगी या नई सरकार की सभी नीतियों पर उनका प्रभाव होगा। यह गठबंधन की शर्तों और सरकार के साझा कार्यक्रम पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गादी आइजनकोट नए प्रधानमंत्री बनकर नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक कार्यकाल का अंत करेंगे और क्या सत्ता परिवर्तन के बाद नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमों में कोई नया मोड़ आएगा?

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