प्रयागराज/रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
इस फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। वहीं, आजम खान की रिहाई फिलहाल दूसरे मामलों के कारण अटक सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अब्दुल्ला आजम खान के पास कथित तौर पर दो पैन कार्ड होने से जुड़ा है। आरोप है कि दोनों कार्डों पर अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज थीं। भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद वर्ष 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मामले में आजम खान पर भी अपने बेटे के साथ कथित फर्जीवाड़े और साजिश में शामिल होने के आरोप लगे थे। इन आरोपों पर निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।
आजम खान को 10 साल, बेटे को 7 साल की सजा
इस मामले में 17 नवंबर 2025 को रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में सजा बढ़ाने से जुड़ी कार्यवाही के बाद आजम खान की सजा 10 साल कर दी गई, जबकि अब्दुल्ला आजम की सजा सात साल ही रही।
दोनों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिकाओं में दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने अब सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग स्वीकार कर ली, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अब्दुल्ला आजम बाहर आएंगे, आजम खान की रिहाई क्यों मुश्किल?
हाईकोर्ट के आदेश से अब्दुल्ला आजम की रिहाई की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, जेल से बाहर आने की प्रक्रिया अदालत के आदेश और आवश्यक औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर, आजम खान के खिलाफ अन्य मामले भी लंबित हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मामले और उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग की कार्रवाई उनकी रिहाई में बाधा बन सकती है। यदि किसी अन्य मामले में प्रभावी गिरफ्तारी या हिरासत का आदेश है, तो दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बावजूद उन्हें जेल में रहना पड़ सकता है।
जमानत मिली, लेकिन राजनीतिक मुश्किलें बरकरार
हाईकोर्ट के फैसले से आजम खान और उनके बेटे को जेल में रहने से राहत पाने का कानूनी रास्ता मिला है, लेकिन इसे बरी होना नहीं माना जा सकता। अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। इसलिए इस फैसले से जुड़े कानूनी और चुनावी परिणामों पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब्दुल्ला आजम की रिहाई कितनी जल्दी होती है और आजम खान को अन्य मामलों में कब राहत मिलती है। हाईकोर्ट का यह फैसला पिता-पुत्र के लिए अहम कानूनी राहत जरूर है, लेकिन आजम खान की जेल से रिहाई अभी दूसरे मुकदमों की स्थिति पर निर्भर करती है।





