महिला की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के आरोपों में गिरी गाज, SSP कार्यालय पहुंची फरियाद के बाद तत्काल निलंबन, विभागीय जांच के आदेश
बरेली। जनपद बरेली में पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने सख्त रुख अपनाया है। थाना बहेड़ी में तैनात आरक्षी अंकुश खन्ना को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और कदाचार के आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में जवाबदेही और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
23 अक्टूबर को महिला ने थाने में दी थी शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को एक महिला ने थाना बहेड़ी पहुंचकर अपनी समस्या से संबंधित शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। महिला की शिकायत को थाने के जनसुनवाई रजिस्टर में विधिवत दर्ज किया गया था।
आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। महिला अपनी शिकायत के निस्तारण का इंतजार करती रही, लेकिन उसे संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। मामले में जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे आरक्षी अंकुश खन्ना की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए।
पांच दिन बाद SSP कार्यालय पहुंची महिला
थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से परेशान महिला 28 अक्टूबर को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची। यहां उसने अपनी शिकायत दोबारा प्रस्तुत करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
महिला ने आरोप लगाया कि उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित जांचकर्ता ने गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया। साथ ही आरक्षी पर अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं करने के आरोप भी लगाए गए।
महिला की शिकायत में सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने मामले का संज्ञान लिया।
SSP अनुराग आर्य ने तत्काल किया निलंबित
शिकायत से जुड़े तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप सामने आने पर SSP ने आरक्षी अंकुश खन्ना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
आरक्षी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जांच में शिकायत के निस्तारण में हुई कथित देरी, जांचकर्ता की भूमिका और पदीय जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
हालांकि, आरक्षी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
जनसुनवाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह प्रकरण पुलिस की जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। जब किसी शिकायत को थाने के आधिकारिक जनसुनवाई रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है, तो उसके निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की होती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि 23 अक्टूबर को दर्ज शिकायत पर पांच दिन बाद भी अपेक्षित कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतकर्ता को अपनी समस्या लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक क्यों पहुंचना पड़ा?
मामले ने थानों में आने वाली शिकायतों की निगरानी और उनके समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
लापरवाह पुलिसकर्मियों के लिए सख्त संदेश
SSP अनुराग आर्य की इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बहेड़ी थाने के आरक्षी अंकुश खन्ना के निलंबन से यह संदेश गया है कि जनशिकायतों के निस्तारण में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।
अब विभागीय जांच के परिणाम पर नजर रहेगी। जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के पीछे किन परिस्थितियों और जिम्मेदारियों की भूमिका रही।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कार्रवाई के बाद थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों को समय पर न्याय मिल सकेगा और जनसुनवाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई देगा?






