करवा चौथ 2026: प्रेम, विश्वास और समर्पण का पर्व
भारतीय संस्कृति में करवा चौथ दांपत्य प्रेम, विश्वास और समर्पण से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन इसके मूल में आज भी प्रेम, परिवार और रिश्तों की मंगलकामना की भावना बनी हुई है।
29 अक्टूबर को करवा चौथ
वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। संभल में करवा चौथ पूजा का शुभ समय लगभग शाम 5:44 बजे से 7:00 बजे तक रहेगा, जबकि चंद्रोदय लगभग रात 8:30 बजे होने की संभावना है। चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
करवा चौथ की प्रचलित मान्यता और कथा
करवा चौथ के साथ अनेक लोककथाएं प्रचलित हैं। इनमें वीरावती की कथा विशेष रूप से सुनाई जाती है। लोकमान्यता के अनुसार वीरावती ने अपने पति की लंबी आयु की कामना से करवा चौथ का व्रत रखा था। भूख-प्यास से उसकी स्थिति कमजोर होने पर उसके भाइयों ने चंद्रमा निकलने का भ्रम उत्पन्न कर दिया। वीरावती ने उसे चंद्रमा समझकर व्रत खोल दिया। कथा के अनुसार इसके बाद उसके पति के जीवन में संकट आया। अंततः श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत करने पर संकट दूर हुआ। वीरावती की कथा को ऐतिहासिक घटना के बजाय धार्मिक एवं लोकपरंपरा में प्रचलित कथा के रूप में समझना उचित है। इसका मुख्य संदेश संकल्प, श्रद्धा और व्रत के नियमों के पालन से जुड़ा माना जाता है।
आज के समय में पर्व का संदेश
करवा चौथ केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि रिश्तों की अहमियत को समझने का अवसर भी है। आज कई दंपती इस पर्व को एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान, विश्वास और साथ निभाने के संकल्प के रूप में मनाते हैं। मेहंदी, सोलह श्रृंगार, पूजा, कथा और चंद्र दर्शन इस पर्व को सांस्कृतिक रूप से भी विशेष बनाते हैं।
बदलते समय में करवा चौथ की भावना को पति-पत्नी दोनों के सुख, स्वास्थ्य और समृद्ध दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जोड़ा जा सकता है। यही इस पर्व की सबसे सुंदर सीख है कि रिश्ते केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे का साथ निभाने से मजबूत होते हैं।





