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रेखा आर्य की FIR के बाद पप्पू गिरधारी का पलटवार, सीएम-पीएम आवास पर धरने की चेतावनी, बरेली में भी हलचल

फर्जी वीडियो और तहरीर के जरिए छवि खराब करने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग; बनखंडी नाथ मंदिर स्थित कार्यालय से भी नदारद बताए जा रहे पप्पू गिरधारी, राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज

बरेली। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति एवं भाजपा नेता गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है। मंत्री रेखा आर्य की ओर से मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद पप्पू गिरधारी ने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो जारी कर आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने अपने खिलाफ कथित फर्जी वीडियो और तहरीर के जरिए छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इतना ही नहीं, उन्होंने न्याय नहीं मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास पर धरना देने की चेतावनी भी दी है।

1995 से भाजपा का कार्यकर्ता होने का दावा, बोले—दोषी हूं तो जेल भेज दो

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में पप्पू गिरधारी ने खुद को वर्ष 1995 से भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दे, लेकिन यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कथित फर्जी वीडियो और तहरीर के माध्यम से उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

25 साल के साथ का दिया हवाला, वीडियो में छलका दर्द

पप्पू गिरधारी ने अपने वीडियो में करीब 25 वर्षों के साथ का हवाला देते हुए नाराजगी व्यक्त की। उनके बयान से साफ है कि मामला अब केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पारिवारिक संबंधों और सार्वजनिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।

उन्होंने कहा कि वह निष्पक्ष जांच चाहते हैं और अपनी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। न्याय नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने की चेतावनी ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

बनखंडी नाथ मंदिर स्थित कार्यालय से नदारद होने की चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम का असर बरेली में भी देखने को मिल रहा है। पप्पू गिरधारी का बरेली से पुराना कारोबारी और सामाजिक जुड़ाव बताया जाता है। वह शहर के प्रसिद्ध बनखंडी नाथ मंदिर के संरक्षक भी हैं और मंदिर परिसर स्थित कार्यालय से निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करते रहे हैं।

एफआईआर दर्ज होने के बाद से उनके कार्यालय में सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आने की चर्चा है। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। यह भी पुष्टि नहीं हुई है कि वह फिलहाल कहां मौजूद हैं।

रेखा आर्य की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर देहरादून की कैंट कोतवाली में पप्पू गिरधारी के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट, धमकी और कथित कूटरचित दस्तावेजों सहित अन्य गंभीर आरोपों को लेकर मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मंत्री की शिकायत और पप्पू गिरधारी के सार्वजनिक पलटवार के बाद दोनों पक्षों के आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, एफआईआर में आरोप दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है।

पुलिस जांच पर टिकी निगाहें, आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस जांच में दोनों पक्षों के दावों और आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। पप्पू गिरधारी ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को चुनौती दी है।

वहीं, बरेली से लेकर उत्तराखंड तक इस विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की विवेचना, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराना जल्दबाजी होगी। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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