हंसने की मामूली बात पर आठवीं की छात्रा से मारपीट का आरोप, एक्सरे में फ्रैक्चर का दावा, पुलिस पर कार्रवाई न करने का भी आरोप
बरेली। सुभाषनगर थाना क्षेत्र के एक गांव में स्थित कम्पोजिट पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ की 13 वर्षीय दलित छात्रा के साथ कथित मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पीटी की कक्षा के दौरान छात्रा के हंसने से नाराज शिक्षक ने प्लास्टिक के क्रिकेट विकेट से उसके हाथ पर वार कर दिया, जिससे उसकी दाहिनी कलाई में फ्रैक्चर हो गया। पीड़िता की मां ने शिक्षक पर जातिसूचक गालियां देकर अपमानित करने और पुलिस पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
हंसने पर शिक्षक ने छात्रा को पीटा!
पीड़िता की मां के अनुसार, पांच अक्टूबर को विद्यालय में पीटी की कक्षा चल रही थी। इसी दौरान उनकी बेटी किसी बात पर हंस पड़ी। आरोप है कि इससे नाराज शिक्षक ने प्लास्टिक के विकेट से छात्रा के हाथ पर जोरदार वार कर दिया। चोट लगने के बाद छात्रा दर्द से परेशान हो गई।
घर पहुंचकर छात्रा ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। बेटी की हालत देखकर मां विद्यालय पहुंचीं और शिक्षक से मारपीट का कारण पूछा।
मां-बेटी से जातिसूचक अभद्रता का आरोप
पीड़िता की मां का आरोप है कि शिक्षक ने शिकायत सुनने के बजाय मां-बेटी के साथ अभद्र व्यवहार किया। कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर दोनों को विद्यालय से भगा दिया गया।
पुलिस पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप
परिवार के अनुसार, छह अक्टूबर को छात्रा के माता-पिता सुभाषनगर थाने और रामगंगा पुलिस चौकी पहुंचे। वहां शिक्षक के खिलाफ शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मां ने एक दरोगा पर शिकायत सुनने के बजाय उन्हें भगा देने का भी आरोप लगाया है।
एक्सरे में फ्रैक्चर, हाथ पर चढ़ा प्लास्टर
सात अक्टूबर को छात्रा को जिला अस्पताल ले जाया गया। परिवार का दावा है कि एक्सरे जांच में उसकी दाहिनी कलाई में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने घायल हाथ पर कच्चा प्लास्टर चढ़ाया।
जिलाधिकारी से न्याय की गुहार
पुलिस से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता की मां ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, आरोपी शिक्षक के खिलाफ एफआईआर और जातिसूचक अपमान के आरोपों पर एससी-एसटी एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल शिक्षक और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा मेडिकल साक्ष्यों की जांच होना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन पीड़ित परिवार की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।






