राष्ट्रीय चेयरमैन असगर आलम बोले—चिकित्सा सेवा में लापरवाही या कमी होने पर उपभोक्ताओं का न्याय पाने का अधिकार और मजबूत हुआ
नई दिल्ली। विश्व उपभोक्ता संगठन भारत ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चिकित्सा सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में बनाए रखने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे देशभर के उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।
संगठन के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री असगर आलम ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही, कमी अथवा त्रुटि का सामना करने वाले उपभोक्ताओं के लिए न्याय पाने का मार्ग और अधिक सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवाओं से संबंधित मामलों में उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानूनी संरक्षण मिलना बेहद आवश्यक है।
सर्वोच्च न्यायालय ने डॉक्टरों और अस्पतालों को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में लाने से संबंधित 31 वर्ष पुराने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने वर्ष 1995 में दिए गए फैसले के विरुद्ध दायर उपचारात्मक याचिका को खारिज करते हुए चिकित्सा सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में बनाए रखा है।
इस निर्णय के बाद चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही अथवा सेवा में कमी की स्थिति में प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का अधिकार कायम रहेगा। संगठन का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्री असगर आलम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जब चिकित्सा सेवा प्राप्त करता है तो वह बेहतर, सुरक्षित और उचित सेवा की अपेक्षा करता है। यदि सेवा में गंभीर कमी या लापरवाही सामने आती है, तो पीड़ित उपभोक्ता को न्याय पाने का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से उपभोक्ता अधिकारों के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि विश्व उपभोक्ता संगठन भारत देशभर में उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय को उपभोक्ता हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम बताते हुए देश के सभी उपभोक्ताओं के लिए इसे आश्वस्तकारी निर्णय करार दिया है।






