संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार बनीं राज्यसभा उम्मीदवार, रुहेलखंड के साथ OBC समीकरण साधने की कोशिश
बरेली। उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं। भाजपा की आठ उम्मीदवारों की सूची में बरेली की श्रुति गंगवार का नाम शामिल होने से जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण सियासी घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
श्रुति गंगवार पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की बेटी हैं। संतोष गंगवार लंबे समय तक बरेली लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे और केंद्र की अलग-अलग भाजपा सरकारों में मंत्री भी रहे। अब भाजपा ने उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाकर गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को नई पीढ़ी के हाथों आगे बढ़ाने का बड़ा संकेत दिया है।
बरेली से दिल्ली तक बढ़ेगा श्रुति का राजनीतिक कद
श्रुति गंगवार पिछले काफी समय से बरेली में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देती रही हैं। वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं। विभिन्न सामाजिक और पार्टी कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगातार देखने को मिलती रही है। लेकिन राज्यसभा का टिकट मिलने के बाद अब उनका राजनीतिक कद सीधे राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता नजर आ रहा है।
भाजपा की ओर से श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बरेली सहित पूरे रुहेलखंड में गंगवार यानी कुर्मी समाज की अच्छी-खासी राजनीतिक हिस्सेदारी है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समाज चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में माना जाता है। ऐसे में श्रुति के जरिए भाजपा ने बरेली को प्रतिनिधित्व देने के साथ OBC मतदाताओं को भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
संतोष गंगवार की विरासत पर भाजपा का भरोसा
संतोष गंगवार का नाम बरेली की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली रहा है। वह पहली बार 1989 में बरेली से लोकसभा पहुंचे थे और इसके बाद कई बार सांसद चुने गए। केंद्र सरकार में उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। बाद में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
अब उनकी बेटी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने से एक बार फिर गंगवार परिवार बरेली की सियासत के केंद्र में आ गया है। श्रुति गंगवार के लिए यह मौका इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक उनकी पहचान मुख्य रूप से सामाजिक गतिविधियों, सहकारिता क्षेत्र और अपने पिता की राजनीतिक विरासत से जुड़ी रही है। राज्यसभा पहुंचने पर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का अवसर मिलेगा।
आठ उम्मीदवारों में बरेली की श्रुति भी शामिल
भाजपा की सामने आई सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में ब्राह्मण, OBC और अनुसूचित जाति समेत विभिन्न सामाजिक समीकरणों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
इन सभी नामों के बीच बरेली के लिए सबसे बड़ी खबर श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी है। लंबे समय तक संतोष गंगवार के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान रखने वाले बरेली को अब उनकी बेटी के रूप में राज्यसभा में नया प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना बन गई है।
श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी के साथ ही बरेली में उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि वह राज्यसभा पहुंचती हैं तो इसे न सिर्फ उनके राजनीतिक करियर की बड़ी शुरुआत, बल्कि बरेली और रुहेलखंड की राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।






