बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नवरात्र और देवी पूजा के दौरान होने वाली बलि प्रथा को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा को किसी इंसान की बलि की जरूरत नहीं है। अगर देवी को किसी की बलि लेनी होगी, तो वह स्वयं लेने में सक्षम हैं।
धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर वह कैसी मां होगी, जो अपने ही किसी बेटे की बलि ले? उनके मुताबिक, सनातन परंपरा में देवी को मां का स्वरूप माना गया है और मां अपने बच्चों का अहित नहीं चाहती।
बलि के बजाय भक्ति पर जोर
धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से धार्मिक आयोजनों के दौरान हिंसा से बचने और पूजा-पाठ को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ करने की अपील की। उन्होंने देवी आराधना में संयम और सात्विकता को महत्व देने की बात कही।
उनके बयान को नवरात्र के दौरान बलि प्रथा को लेकर चलने वाली बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक परंपराओं के तहत बलि की प्रथा को लेकर समय-समय पर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
‘पाखंडी’ कहे जाने पर भी दी सफाई
धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को लेकर उठने वाले सवालों और ‘पाखंडी’ जैसे आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके बयानों और धार्मिक गतिविधियों को संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को धर्म और आध्यात्मिकता से जोड़ना है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक आस्था के नाम पर गलत परंपराओं को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नवरात्र के दौरान देवी पूजा, मांसाहार और बलि जैसी परंपराओं को लेकर सार्वजनिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
धीरेंद्र शास्त्री का दुर्गा मां को लेकर विवादित बयान बोले यह कैसी माँ जो किसी के बेटे की बलि…..





