अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
करतला//कोरबा जिले में रेत के अवैध परिवहन का मामला एक बार फिर सामने आया है। शासन द्वारा वर्षा ऋतु के दौरान रेत खनन और परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद ग्राम पंचायत घाठाद्वारी के टिकरा मैदान से रेत का परिवहन किए जाने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक ट्रैक्टर के माध्यम से रेत ले जाई जा रही थी और वाहन चालक के पास रेत परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज अथवा रॉयल्टी पर्ची नहीं होने की बात सामने आई है।
मिली जानकारी के अनुसार, मड़वारानी निवासी अजय पटेल ने बताया कि ग्राम पंचायत घाठाद्वारी के टिकरा मैदान में रेत डंप की गई है और वहीं से रेत को ट्रैक्टर के माध्यम से ले जाया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित रेत के परिवहन के लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति या परिवहन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेत का परिवहन नियमानुसार किया जा रहा है तो उसके लिए आवश्यक रॉयल्टी पर्ची और अन्य वैध दस्तावेज मौके पर उपलब्ध होने चाहिए।
अधिकारियों को सूचना देने की कोशिश पर विवाद का आरोप
स्थानीय व्यक्ति के अनुसार जब मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, तब ट्रैक्टर चालक द्वारा कथित तौर पर वाहन को मौके से हटा दिया गया। आरोप है कि चालक ने अधिकारियों अथवा शिकायत करने वालों को चुनौती देते हुए आपत्तिजनक एवं दबंगईपूर्ण अंदाज में बात की और ट्रैक्टर लेकर मौके से चला गया।
इस दौरान एक और गंभीर सवाल सामने आया कि जिस ट्रैक्टर से रेत का परिवहन किए जाने का आरोप है, उस पर वाहन नंबर भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। यदि वाहन वास्तव में बिना पंजीयन नंबर अथवा अस्पष्ट नंबर के सड़क पर चल रहा था, तो यह परिवहन नियमों के अनुपालन को लेकर भी जांच का विषय बन सकता है।
15 जून से 15 अक्टूबर तक प्रतिबंध
बताया गया है कि शासन-प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष मानसून अवधि में रेत खनन एवं परिवहन को लेकर प्रतिबंधात्मक व्यवस्था लागू की जाती है। इस अवधि में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर खनिज विभाग द्वारा निगरानी एवं कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित अवधि में बिना अनुमति और बिना रॉयल्टी के रेत का परिवहन किया जा रहा है,
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद कुछ लोग चोरी-छिपे अथवा खुलेआम रेत का परिवहन कर रहे हैं। इससे जहां शासन के नियमों की अनदेखी हो रही है, वहीं अवैध परिवहन के कारण सरकार को मिलने वाले राजस्व को भी नुकसान होने की आशंका है।
बिना रॉयल्टी पर्ची के परिवहन की जांच जरूरी
मौके पर ट्रैक्टर चालक से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर उसके पास रेत परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या रॉयल्टी पर्ची नहीं मिली। हालांकि इस संबंध में वास्तविक स्थिति का स्पष्ट निर्धारण संबंधित खनिज विभाग की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किया जा सकता है।
रेत परिवहन के मामले में वाहन का पंजीयन नंबर, रेत के स्रोत, परिवहन की अनुमति, रॉयल्टी पर्ची तथा संबंधित खनिज नियमों के तहत आवश्यक दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण है। यदि जांच में दस्तावेज नहीं पाए जाते हैं और रेत का स्रोत भी अवैध मिलता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खनिज विभाग की कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
जिले में अवैध रेत परिवहन को रोकने के लिए खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आती रही है। इसके बावजूद प्रतिबंधित अवधि में यदि रेत का परिवहन जारी है, तो यह विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि ग्राम पंचायत घाठाद्वारी के टिकरा मैदान में डंप की गई रेत और वहां से किए जा रहे कथित परिवहन की जांच की जाए। साथ ही मौके पर पहुंचकर रेत की मात्रा, उसके स्रोत, परिवहन करने वाले वाहनों के दस्तावेज और रॉयल्टी पर्चियों का सत्यापन किया जाए।
सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और खनिज विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अवैध रेत उत्खनन, डंपिंग या परिवहन की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल वाहन मालिक, चालक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले में संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौके से ले जाई जा रही रेत वैध स्रोत से थी या अवैध रूप से डंप अथवा परिवहन की जा रही थी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल शासन के प्रतिबंधात्मक आदेश की अवहेलना होगी, बल्कि खनिज राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी मामला बन सकता है।







