बरेली। कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह की कोशिश कर प्रशासन पर दबाव बनाने के मामले में अब पुलिस-प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कैंट थाना क्षेत्र के मानपुर चिकटिया गांव में जमीन के विवाद से जुड़े चार लोगों से मुचलका पाबंदी की कुल चार लाख रुपये की राशि वसूल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ ही जिस 60 गज जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार विवाद चल रहा है, उस जमीन पर रिसीवर नियुक्त कर उसे प्रशासनिक निगरानी में लेने की तैयारी भी की जा रही है।
60 गज जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद
मानपुर चिकटिया गांव में कमलेश और दूसरे पक्ष के राजवीर के बीच करीब 60 गज जमीन को लेकर विवाद बताया जा रहा है। दोनों पक्ष जमीन पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। विवाद के चलते कई बार तनाव की स्थिति बनी और मामला पुलिस तक पहुंचा। लगातार हो रहे विवाद को देखते हुए पुलिस ने पूर्व में भी निरोधात्मक कार्रवाई की थी।
पुलिस के अनुसार कमलेश, उसके बेटे आशुतोष और निर्दोष को 20 जून को निरोधात्मक कार्रवाई के तहत एक-एक लाख रुपये के मुचलके से पाबंद किया गया था। यह पाबंदी छह महीने की अवधि के लिए बताई गई है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच शांति बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना था।
दोबारा विवाद के बाद हुई थी कार्रवाई
इसके बाद 15 जुलाई को निर्दोष और मोनू का दूसरे पक्ष के साथ फिर विवाद होने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले में शांतिभंग की कार्रवाई करते हुए चालान किया। इसके साथ ही मोनू को भी एक लाख रुपये के मुचलके से पाबंद कर दिया गया।
इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ। बाद में कलेक्ट्रेट परिसर में कमलेश और मोनू की बहन रोशनी से जुड़ी आत्मदाह की कोशिश का मामला सामने आया। इस घटना के बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुराने मुचलकों और जमीन विवाद से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू की।
चार लाख रुपये की वसूली के लिए एसडीएम को पत्र
कैंट पुलिस ने अब कमलेश, आशुतोष, निर्दोष और मोनू से एक-एक लाख रुपये के हिसाब से कुल चार लाख रुपये की मुचलका राशि वसूल कराने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए एसडीएम सदर को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
पुलिस का मानना है कि जिन लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुचलके से पाबंद किया गया था, उनके द्वारा शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विवादित जमीन पर रिसीवर नियुक्त करने की तैयारी
लगातार विवाद को देखते हुए कैंट इंस्पेक्टर संजय धीर ने एसडीएम सदर को पत्र लिखकर विवादित जमीन पर रिसीवर नियुक्त करने का अनुरोध किया है। रिसीवर नियुक्त होने के बाद जमीन प्रशासन की निगरानी में रहेगी, जिससे दोनों पक्षों के बीच कब्जे या स्वामित्व को लेकर नए विवाद की आशंका को कम किया जा सके।
मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। जमीन के स्वामित्व का अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।






