- परिजनों का आरोप—21 अगस्त की रात घर से ले गई पुलिस, 48 से 60 घंटे तक परिवार को गुमराह किया
- 23 अगस्त को ठिरिया-खेतल के पास से गिरफ्तारी दर्शाकर दोनों होमगार्डों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजने का दावा
- कैनबिज कंपनी में निवेश के पैसों को लेकर विवाद, परिजनों का दावा—दोनों होमगार्डों का कंपनी से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं
- डीआईजी, आईजी और मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने की अपील
बरेली। थाना पश्चिमी फतेहगंज पुलिस द्वारा पंकज त्रिपाठी पुत्र स्व. वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी निवासी ग्वाला गली, सुभाषनगर की तहरीर के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ 10 लाख रुपये की रंगदारी, कैनबिज कंपनी में दबाव बनाकर पैसा लगवाने तथा जान से मारने की धमकी देने के मामले में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद मामला विवादों में आ गया है। मामले में आरोपी बनाए गए होमगार्ड प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोनों को निर्दोष बताया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दोनों होमगार्डों को 21 अगस्त की आधी रात उनके घरों से उठाया, जबकि 23 अगस्त को ठिरिया-खेतल के पास से गिरफ्तारी दर्शाकर न्यायालय में पेश किया गया। परिजनों ने डीआईजी, आईजी और मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
परिजनों के अनुसार नरेश मौर्य पुत्र स्व. छोटेलाल मौर्य निवासी सराय तल्फी, थाना सीबीगंज को 21 अगस्त की रात करीब 1 से 1:15 बजे के बीच उनके घर से पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए। वहीं प्रवेश मिश्रा पुत्र नेत्रपाल मिश्रा निवासी तिलक कॉलोनी, थाना सुभाषनगर को भी उसी रात करीब 1:30 से 1:45 बजे के बीच उनके घर से ले जाया गया। आरोप है कि दोनों को ले जाने वाली गाड़ियों का परिजनों ने पीछा किया तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि दोनों को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है और एक से डेढ़ घंटे में वापस घर छोड़ दिया जाएगा। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने पीछा करना जारी रखा तो उन्हें मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर वापस भेज दिया गया।
इसके बाद दोनों के परिवारजन पुलिस लाइन और कई थानों में उनकी तलाश करते रहे, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य कहां हैं। परिजनों का आरोप है कि करीब 48 से 60 घंटे तक उन्हें गुमराह किया गया। 23 अगस्त को विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और उन्हें न्यायालय में पेश करने के लिए लाया जा रहा है। इसके बाद दोनों होमगार्डों के परिवारजन न्यायालय पहुंचे। वहां पांचों आरोपियों को पेश किया गया और न्यायालय से सभी को जेल भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक जेल ले जाते समय उन्हें प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य से मिलने का मौका मिला।
परिजनों का कहना है कि प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य दोनों होमगार्ड हैं और कैनबिज कंपनी से उनका कोई प्रत्यक्ष व्यावसायिक संबंध नहीं है। उनका दावा है कि दोनों की पत्नियां कंपनी से जुड़ी थीं। नरेश मौर्य की पत्नी द्रोपा देवी ने कैनबिज कंपनी में अपना पैसा लगाया था। नरेश मौर्य और प्रवेश मिश्रा होमगार्ड विभाग में साथ ड्यूटी करते हैं और दोनों के बीच मित्रता होने के कारण उनके परिवारों में भी आना-जाना था। इसी क्रम में द्रोपा देवी ने प्रवेश मिश्रा की पत्नी ज्योति मिश्रा का पैसा भी कैनबिज कंपनी में लगवाकर उन्हें कंपनी से जोड़ा था।
परिजनों के मुताबिक प्रवेश मिश्रा की पत्नी ज्योति मिश्रा ने कैनबिज कंपनी के संबंध में पंकज त्रिपाठी की पत्नी नीतू त्रिपाठी को जानकारी दी थी। इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने कंपनी से जुड़ने की इच्छा जताते हुए कथित रूप से कहा कि फिलहाल उसके पास पैसा नहीं है और व्यवस्था होने पर वह पैसा वापस कर देगा। परिजनों का दावा है कि इसी आधार पर कुछ धनराशि प्रवेश मिश्रा और कुछ धनराशि नरेश मौर्य द्वारा पंकज त्रिपाठी को दी गई थी। उनका कहना है कि पैसे के लेनदेन से संबंधित लिखित साक्ष्य और पैसा देते समय का वीडियो भी उनके पास मौजूद है। आरोप है कि पंकज त्रिपाठी ने यह धनराशि कंपनी में लगा दी, लेकिन कुछ समय बाद कंपनी बंद हो गई।
कंपनी बंद होने के बाद निवेश की रकम को लेकर विवाद शुरू होने का आरोप है। प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य के परिजनों का कहना है कि पंकज त्रिपाठी ने दोनों से करीब सात लाख रुपये देने का दबाव बनाया। आरोप है कि दोनों को नौकरी प्रभावित करने और पुलिस में शिकायत करने की धमकी भी दी गई। परिजनों का यह भी दावा है कि पंकज त्रिपाठी ने प्रवेश मिश्रा से कथित तौर पर कहा कि सात लाख रुपये दिए जाएं अथवा सात लाख रुपये डाउन पेमेंट देकर उसके नाम पर एक्सयूवी-700 गाड़ी निकलवाई जाए, जिसे वह अपने उपयोग में चलाएगा। प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य द्वारा कथित मांग नहीं माने जाने के बाद रंजिश बढ़ने का आरोप लगाया गया है।
परिजनों का आरोप है कि इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने होमगार्ड विभाग में भी शिकायतें कीं और दोनों पर पैसे देने का दबाव बनाया। उनका दावा है कि जब प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य ने कथित दबाव नहीं माना तो पुलिस में शिकायत कर उन्हें परेशान किया जाने लगा। परिजनों ने पूरे मामले को साजिश बताते हुए आरोप लगाया है कि दोनों होमगार्डों को फंसाने के लिए पुलिस के साथ मिलीभगत की गई और मामले को वास्तविक दिखाने के लिए तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया।
मामले में प्रवेश मिश्रा पर बंदूक रखकर जान से मारने की धमकी देने के आरोप को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रवेश मिश्रा की बंदूक काफी समय से जमा है और उसके जमा होने की रसीद उनके पास मौजूद है। ऐसे में परिजनों ने जांच एजेंसियों से यह भी जांच करने की मांग की है कि जिस समय धमकी देने का आरोप लगाया गया, उस समय कथित हथियार प्रवेश मिश्रा के पास था या नहीं।
परिजनों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने पुलिस से दोनों होमगार्डों को घर से ले जाने की घटना, गिरफ्तारी के समय और स्थान, कथित लेनदेन, वीडियो, लिखित दस्तावेज, बंदूक जमा होने की रसीद तथा कैनबिज कंपनी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
प्रवेश मिश्रा और नरेश मौर्य के परिजनों ने डीआईजी, आईजी और मुख्यमंत्री से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। परिजनों का दावा है कि दोनों होमगार्ड निर्दोष हैं और उन्हें आपसी धनराशि के विवाद में फंसाया गया है।
वहीं, पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में पंकज त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर पांचों आरोपियों पर रंगदारी, धमकी और कैनबिज कंपनी में दबाव बनाकर पैसा लगवाने समेत आरोप लगाए गए हैं। पांचों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किए जाने की कार्रवाई की गई है।






