लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
विभूतिपुर। प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत भरपुरा पटपारा पंचायत के चोचाही भरपुरा स्थित वार्ड संख्या-13 में नव निर्मित पंचायत सरकार भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रखंड स्तर से बीपीआरओ द्वारा भवन को ठेकेदार से हैंडओवर लेकर उसकी चाबी पंचायत के मुखिया को सौंपे जाने के बाद जब मुखिया ने भवन का निरीक्षण किया तो उन्हें भवन के विभिन्न हिस्सों में जगह-जगह बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दीं। मुखिया ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग वरीय पदाधिकारियों से की है। मौके पर मुखिया के साथ जदयू के प्रदेश नेता सुशील कुमार सिंह एवं अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे।
मुखिया का कहना है कि भवन के लगभग हर हिस्से में दरारें दिखाई दे रही हैं। अचानक विभिन्न कमरों और दीवारों में दरारें आने से उन्हें भवन की मजबूती को लेकर आशंका उत्पन्न हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं भवन की नींव या बेस से जुड़ी किसी तकनीकी समस्या के कारण तो ये दरारें नहीं आई हैं। यदि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर गंभीर कमी रही है तो भविष्य में भवन को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मियों और आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो सकता है।
मुखिया ने मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन को पंचायत को सौंपने से पहले उसकी गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की विधिवत जांच होनी चाहिए थी। यदि हैंडओवर से पहले भवन का निरीक्षण किया गया था तो फिर उस समय इतनी बड़ी-बड़ी दरारें संबंधित अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आईं, यह जांच का विषय है।
वहीं, इस विषय को लेकर जदयू के प्रदेश नेता सुशील कुमार सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य में घोर अनियमितता प्रतीत हो रही है। विभागीय पदाधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है। अगर पदाधिकारी स्तर से कार्रवाई नहीं होती है तो इस मामले को मंत्री स्तर तक ले जाएंगे।
मामले को लेकर जब प्रखंड विकास पदाधिकारी, विभूतिपुर से जानकारी ली गई तो उन्होंने मौखिक रूप से बताया कि मामले को वरीय पदाधिकारी के संज्ञान में भेजकर जांच कराने की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, इस संबंध में एसडीओ, रोसड़ा से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि भवन का हैंडओवर प्रखंड स्तर से किया गया है और इस मामले में संबंधित अधिकारी से ही जानकारी ली जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारी से संपर्क कराने की बात कही, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई कॉल बैक नहीं आया।
हैंडओवर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत सरकार भवन की चाबी पंचायत को सौंपने से पहले क्या संबंधित तकनीकी एवं विभागीय पदाधिकारियों ने भवन का विधिवत निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण किया गया था तो भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में मौजूद दरारें उस समय क्यों नहीं दिखाई दीं? क्या हैंडओवर से पहले भवन की गुणवत्ता, मजबूती और निर्माण सामग्री की जांच की गई थी?
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि भवन के निर्माण के दौरान किन-किन पदाधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों ने समय-समय पर स्थल निरीक्षण किया, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई और निरीक्षण के दौरान क्या-क्या रिपोर्ट तैयार की गई। यदि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता संबंधी कोई आपत्ति या कमी सामने आई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?
जांच रिपोर्ट सामने आने से खुलेगा राज
अब पूरे मामले में निष्पक्ष तकनीकी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि भवन में आई दरारें सामान्य हैं या निर्माण की गुणवत्ता, नींव, सामग्री अथवा तकनीकी खामी से जुड़ी हुई हैं। साथ ही निर्माण कार्य से संबंधित स्वीकृत नक्शा, प्राक्कलन, मापी पुस्तिका, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट, निरीक्षण प्रतिवेदन और हैंडओवर से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए।
पंचायत सरकार भवन सरकारी राशि से निर्मित सार्वजनिक भवन है। ऐसे में भवन के उपयोग से पहले उसकी सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभागीय जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि वरीय पदाधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या तकनीकी टीम से स्थल की जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाती है।












