लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
पुलिस बार-बार कह रही—अपराधियों की पहचान हो चुकी, फिर गिरफ्तारी में देरी क्यों? मोकामा तक कनेक्शन की चर्चा, जांच की रफ्तार पर उठ रहे सवाल
समस्तीपुर/विभूतिपुर। विभूतिपुर थाना क्षेत्र के सिंघिया घाट पंचवटी चौक स्थित दिनेश ज्वेलर्स एंड सन्स में हुई गोलीबारी और लूट के प्रयास की घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अपराधियों तक नहीं पहुंच पाए हैं। घटना के बाद से पुलिस लगातार अपराधियों की पहचान कर लिए जाने और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत होने की बात कह रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गिरफ्तारी कब होगी?
बताते चलें कि गुरुवार, 16 जुलाई 2026 की देर शाम बोलेरो से पहुंचे 5-6 नकाबपोश अपराधियों ने दिनेश ज्वेलर्स एंड सन्स में लूट का प्रयास किया था। दुकान संचालक दिनेश शाह द्वारा विरोध किए जाने पर अपराधियों ने गोली चला दी, जो उनके पैर में लगी। इसके बाद बदमाशों ने दहशत फैलाने के उद्देश्य से दो-तीन राउंड हवाई फायरिंग की और बोलेरो से खोकसाहा चौक की ओर फरार हो गए।
घटना के बाद घायल दुकानदार को स्थानीय लोगों की मदद से विभूतिपुर सीएचसी पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ संजय कुमार सिन्हा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों को खंगालने की बात कही थी। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि अपराधियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
लेकिन अब सवाल यह है कि यदि अपराधियों की पहचान हो चुकी है, तो उनकी गिरफ्तारी में आखिर इतनी देरी क्यों?
मोकामा तक पहुंची जांच, फिर भी हाथ खाली?
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि इस गोलीकांड का कथित नेटवर्क मोकामा तक जुड़ा हो सकता है और पुलिस टीम वहां तक भी जांच के सिलसिले में पहुंची है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अगर जांच का दायरा जिले से बाहर तक पहुंच चुका है और पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी हैं, तो फिर गिरफ्तारी में देरी पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
पुलिस की मजबूरी या जांच की रफ्तार पर सवाल?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्वेलरी दुकान में गोलीबारी जैसी घटना केवल एक दुकानदार की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि पूरे कारोबारी वर्ग की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। घटना के बाद क्षेत्र के व्यवसायियों में भय का माहौल है।
स्थानीय लोगों और व्यवसायियों का सवाल है कि अपराधियों की पहचान होने के बावजूद यदि गिरफ्तारी नहीं होती है, तो क्या पुलिस किसी ठोस कड़ी का इंतजार कर रही है? क्या जांच में कोई ऐसी बाधा सामने आ रही है, जिसकी वजह से कार्रवाई में समय लग रहा है? या फिर पुलिस के पास अपराधियों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद जांच किसी निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही?
बालू के ढेर ने बचाई बड़ी वारदात?
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार दुकान के सामने लगे बालू के बड़े ढेर के कारण अपराधियों की गतिविधियां प्रभावित हुईं। लोगों का मानना है कि यदि वहां बालू का ढेर नहीं होता, तो अपराधी दुकान के भीतर अधिक समय तक रहकर बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दे सकते थे।
ऐसे में यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
जनता अब पुलिस से सिर्फ यह नहीं जानना चाहती कि अपराधियों की पहचान हो चुकी है, बल्कि यह जानना चाहती है कि गिरफ्तारी कब होगी और इस गोलीकांड के पीछे पूरा नेटवर्क आखिर कौन चला रहा था।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। यदि मोकामा कनेक्शन या अन्य किसी नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।
पुलिस का पक्ष : इस मामले में खबर लिखे जाने तक पुलिस का पक्ष जानने के लिए रोसड़ा एसडीपीओ संजय कुमार सिन्हा से दूरभाष पर संपर्क किया गया। पूरी रिंग जाने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद समस्तीपुर एसपी अरविंद प्रताप सिंह से भी दो बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई और न ही कॉल बैक किया गया।
पुलिस का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होते ही उसे अगली खबर में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।






