कैंट के मानपुर चिकटिया गांव का मामला, मौके पर पहुंची संयुक्त टीम
बरेली। कैंट थाना क्षेत्र के मानपुर चिकटिया गांव में जमीन के रास्ते को लेकर बुधवार सुबह हुए विवाद में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच के बाद नया तथ्य सामने आया है। गाटा संख्या 139 और 145 के बीच रास्ते को लेकर किए गए दावे की मौके पर जांच और राजस्व अभिलेखों के मिलान में कोई रास्ता दर्ज नहीं मिला। राजस्व टीम की पैमाइश में भी दोनों गाटों के बीच रास्ता मौजूद नहीं पाया गया। अधिकारियों के अनुसार गाटा संख्या 145 में रास्ते का दावा करने वाले पक्ष का कोई हिस्सा या मालिकाना हक भी नहीं मिला।
नींव भरने को लेकर हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार ग्राम मानपुर चिकटिया के मुख्य मार्ग पर गाटा संख्या 145 पैतृक भूमि है। इस जमीन पर राजवीर सिंह का मकान बना हुआ है, जबकि गाटा संख्या 139 से लगी खाली जमीन भी मौजूद है। बुधवार सुबह राजवीर सिंह ने अपने मकान के सामने गाटा संख्या 145 की जमीन में सड़क के फ्रंट पर निर्माण के लिए नींव भरने का काम शुरू किया।
इसी दौरान कमलेश देवी पत्नी नरेशपाल और मुन्नी देवी पत्नी जगपाल सिंह अपने बेटों के साथ मौके पर पहुंचीं और निर्माण का विरोध किया। उनका कहना था कि गाटा संख्या 139 की जमीन का रास्ता शिवराज सिंह के मकान के बगल से सड़क तक जाता है। रास्ता रोके जाने के आरोप को लेकर विवाद बढ़ने पर पुलिस को सूचना दी गई।
डायल-112 की सूचना पर पहुंची पुलिस
निर्दोष सिंह पुत्र नरेशपाल सिंह ने डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस को मौके पर बुलाया। पीआरवी ने तत्काल चौकी इंचार्ज हरेंद्र प्रताप सिंह और उपनिरीक्षक राकेश कुमार सिंह को मौके पर बुलाया। पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और विवाद की स्थिति को देखते हुए राजस्व अभिलेखों के आधार पर रास्ते का निर्धारण कराने के निर्देश दिए।
चौकी इंचार्ज ने लेखपाल से मौके की स्थिति के संबंध में जानकारी ली। लेखपाल ओम सिंह ने राजस्व नक्शे के अनुसार गाटा संख्या 139 और 145 के बीच किसी रास्ते के दर्ज होने से इनकार किया।
डीएम कार्यालय पहुंची महिला, तत्काल भेजी गई टीम
रास्ते के विवाद के समाधान के लिए कमलेश देवी पक्ष की ओर से लेखपाल को मौके पर बुलाने का प्रयास किया गया। लेखपाल से संपर्क नहीं होने पर कमलेश देवी जिला मजिस्ट्रेट परिसर पहुंचीं और निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी बरेली ने पुलिस और राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम को मौके पर भेजकर विधिक तरीके से जांच और निस्तारण के निर्देश दिए।
इसके बाद तहसीलदार भानुप्रताप सिंह, राजस्व निरीक्षक ओमकार सिंह, लेखपाल ओमबाबू तथा कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर, चौकी इंचार्ज उपनिरीक्षक हरेंद्र प्रताप सिंह और पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
पैमाइश में सामने आई अलग स्थिति
संयुक्त टीम की मौके पर जांच और पैमाइश में गाटा संख्या 139 तथा 145 के मध्य राजस्व अभिलेखों में कोई रास्ता दर्ज नहीं पाया गया। अधिकारियों के अनुसार मौके पर भी ऐसा कोई रास्ता मौजूद नहीं मिला। पैमाइश में यह भी सामने आया कि गाटा संख्या 139 में करीब तीन मीटर हिस्सा गाटा संख्या 145 का अधिक आ रहा है। यानी राजस्व टीम के अनुसार गाटा संख्या 145 का लगभग तीन मीटर हिस्सा पहले से ही कम है और गाटा संख्या 139 में कमलेश पक्ष के हिस्से में करीब तीन मीटर जमीन अधिक पाई गई।
जांच में गाटा संख्या 145 में कमलेश देवी आदि पक्ष का कोई हिस्सा या मालिकाना हक नहीं पाया गया। इसी आधार पर राजस्व टीम ने गाटा संख्या 145 में उनके लिए रास्ता दिया जाना नियम के अनुसार संभव नहीं बताया।
पुराने 60 गज के विवाद से अलग है मामला
पुलिस ने स्पष्ट किया कि गांव में पहले से चल रहा 60 गज जमीन का विवाद इस नए विवाद से अलग है। वर्ष 2001 में नरेशपाल द्वारा अपनी कृषि भूमि के हिस्से में से 60 गज जमीन प्रेमा देवी को 10 रुपये के स्टांप पेपर पर बेचे जाने और बाद में जून 2026 में प्रेमा देवी द्वारा उक्त जमीन राजवीर सिंह को बेचे जाने को लेकर पहले विवाद हुआ था। उस मामले में निर्माण रुकवाकर दोनों पक्षों को सिविल/राजस्व न्यायालय में पैरवी करने के निर्देश दिए गए थे। वह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और बुधवार को उस पुराने विवाद में कोई नया निर्माण या विवाद नहीं हुआ।
पुलिस ने शांति व्यवस्था कायम कराई
नए रास्ते के विवाद की जांच के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। मौके पर फिलहाल शांति बनी हुई है। पुलिस के अनुसार विवाद के दौरान पुलिस पर लगाए गए आरोप दबाव बनाने के उद्देश्य से लगाए गए निराधार आरोप बताए गए हैं।
जांच के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रास्ते को लेकर किया गया दावा राजस्व अभिलेखों और मौके की पैमाइश से पुष्ट नहीं हुआ। यदि जांच में किसी पक्ष द्वारा जानबूझकर विवाद पैदा करने, शांति भंग करने या अन्य किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।






