अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
मड़वारानी// करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रोगदा के आश्रित ग्राम बंजारी के ग्रामीणों ने वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर खुद ही श्रमदान कर पहुंच मार्ग तैयार कर दिया। सुशासन तिहार से लेकर जनदर्शन तक कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने सड़क निर्माण की मांग रखने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब ग्रामीणों ने एकजुट होकर कच्चे रास्ते को सुधारने का निर्णय लिया।
जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम बंजारी आज भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लाभ नहीं पा सका है। लगभग 250 की आबादी वाले इस गांव में पक्की सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को हर वर्ष बारिश के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पंचायत मुख्यालय रोगदा से गांव तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
बरसात के दौरान सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को होती है। कई बार आपात स्थिति में लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव का विकास भी प्रभावित हो रहा है।
लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर कच्चे मार्ग पर राखड़ और मुरूम डालकर उसे समतल करना शुरू किया। ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से सड़क को इस लायक बनाया कि बारिश के दिनों में लोगों को आने-जाने में कम परेशानी हो। श्रमदान में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग की गई। चुनाव के समय भी नेताओं से सड़क बनवाने का आग्रह किया गया था। हर बार केवल आश्वासन मिला, लेकिन आज तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान वोट मांगने सभी पहुंच जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि ग्राम बंजारी को शीघ्र प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा अन्य योजना से जोड़कर स्थायी पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। वर्तमान में ग्रामीणों द्वारा किया गया श्रमदान क्षेत्र में जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन गया है, लेकिन लोगों का कहना है कि स्थायी समाधान केवल पक्की सड़क निर्माण से ही संभव है।








