मध्य प्रदेश में एक न्यायिक फैसले के बाद सुरक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
बताया जा रहा है कि न्यायाधीश ने एक चर्चित आपराधिक मामले में 14 दोषियों को सजा सुनाई थी। फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बड़ी संख्या में भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट सामने आईं। इन पोस्ट में कथित तौर पर धमकी भरे संदेश भी शामिल थे, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही सामग्री की जांच शुरू कर दी है और संबंधित अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। जिन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
उधर, हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से शपथपत्र मांगते हुए पूछा है कि न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी न्यायाधीश को उसके फैसले के कारण धमकी देना न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सीधा हमला है। ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई न केवल न्यायाधीशों की सुरक्षा के लिए, बल्कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी जरूरी मानी जाती है।
जज तबस्सुम खान को कत्लेआम की धमकी हाईकोर्ट ने लिया स्वत:संज्ञान बढ़ाई गई सुरक्षा….





