Home / News / चित्रकूट -जो स्त्री अपने पति का कहना नहीं मानती है उसका हश्य सती जैसा होता है – राष्ट्रीय संत स्वामी कमलदास जी बापू

चित्रकूट -जो स्त्री अपने पति का कहना नहीं मानती है उसका हश्य सती जैसा होता है – राष्ट्रीय संत स्वामी कमलदास जी बापू

ब्यूरो संजय मिश्रा
मालाखेड़ा: श्री लाइना बाबा सरकार ( हनुमान जी) की विशेष अनुकंपा से बरखेड़ा गांव की देवी कोठी के श्री भोलेनाथ जी के मंदिर में चल रही 7 दिवसीय संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा में श्री चित्रकूट धाम उत्तर प्रदेश से पधारे श्री शिवमहा पुराण कथा के राष्ट्रीय कथा वाचक श्री रघुवीर मंदिर बडी गुफा जानकी कुण्ड चित्रकूट जिला सतना मध्य प्रदेश के श्री श्री 1008 श्री चतुर्भुज दास जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य राष्ट्रीय संत स्वामी कमलदास जी बापू ने आज चौथे दिन सती जन्म. शिव सती चरित्र की कथा सुनाई उन्होंने कहा कि जो स्त्री अपने पति का कहना नहीं मानती है उसका हश्य सती जैसा होता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया है कि साधक का व्यवहार कैसा होता है ?वह अपने स्वार्थ का त्याग करके दूसरों का हित करता है; अपने सुख-आराम का त्याग करके दूसरों को सुख-आराम देता है; अपनी मान-बड़ाई का त्याग करके दूसरों को मान-बड़ाई देता है – वह किसी के भी प्रति बुराभाव नही रखता । अगर उसको किसी मे दोष दीखते हैं तो वह ऐसा मानता है कि ये दोष उसके शरीर मे, अन्त:करण मे, स्वभाव मे है, स्वयं मे नही है । जैसे किसी के कपड़े मे दाग लग जाय तो वह खुद दागवाला नही हो जाता, ऐसे ही अन्त:करण आदि मे दोष होने से वह स्वयं दोषी नही हो जाता । इस तरह साधक किसी को भी बुरा नही मानता और दूसरों को भी वह प्राय: बुरा नही लगता। मनुष्य जीवन मे साधन का आरम्भ कब होता है ?साधन का आरम्भ होता है – संसार से संतप्त (दु:खी) होने पर और विचार करने पर । जब मनुष्य को संसार से सुख नही मिलता, शान्ति नही मिलती ओर जिनसे वह स्नेह करता है, जिनसे वह सुख लेता है अथवा सुख की आशा रखता है, उनके द्वारा भी उसको धक्का लगता है, तब वह संसार से निराश हो जाता है । उसके भीतर उथल- पुथल मचने लगती है । ऐसी अवस्था मे उसकी भीतर उस सुख को प्राप्त करने की इच्छा (आवश्यकता) जाग्रत होती है, जो नित्य हो, अविनाशी हो, निर्विकार हो, दु:ख से रहित हो । उसका यह उद्देशय हो जाता है कि अब मैं उस सुख को प्राप्त करूँगा, जिसमे दु:ख न हो तथा जिसका कभी अन्त न हो; उस पद को प्राप्त करूँगा, जिससे कभी पतन न हो; उस वस्तु को प्राप्त करूँगा, जिसका कभी वियोग न हो । ऐसा उद्देशय होते ही साधन का आरम्भ हो जाता है । श्री चित्रकूट धाम उत्तर प्रदेश से साथ में आईं बापू जी की धर्मपत्नी श्रीमती ज्ञानवती देवी मिश्रा ने बताया कि कथा सुनने वालों में कथा के चौथे दिन के मुख्य यजमान तेजराम सैनी (भूत). नरेंद्र सैनी पत्नी पुष्पा. पूर्व सरपंच घीसाराम सैनी. धन्नाराम सैनी पत्नी रुक्मणी ख्यालीराम सैनी. चिमनलाल सैनी. नन्दू सैनी. रमेश सैनी. चेतराम सैनी. ताराचंद सैनी. जगनलाल सैनी. दिनेश सैनी. सोनू सैनी तथा सैकड़ों की संख्या में माताएं बहनें उपस्थित रहीं।

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