हिजाब को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच सांसद इकरा हसन ने साफ शब्दों में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना या न पहनना पूरी तरह से मुस्लिम महिलाओं का निजी निर्णय है और इसे किसी भी तरह से सार्वजनिक बहस या राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
इकरा हसन ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी आस्था और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार जीवन जीने की आज़ादी देता है। ऐसे में महिलाओं के पहनावे को लेकर सवाल उठाना या उन पर किसी तरह का दबाव बनाना सही नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की बात करने से पहले उनके फैसलों का सम्मान करना ज़रूरी है।
सांसद ने यह भी कहा कि समाज को महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए, न कि उनके पहनावे को लेकर विवाद खड़ा करना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी महिला की पहचान उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसकी सोच, योग्यता और आत्मनिर्भरता से तय होती है।
इकरा हसन के इस बयान को महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। उनके बयान के बाद हिजाब को लेकर चल रही बहस पर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है।






