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“डॉक्टरों को सीएम स्टालिन की सलाह – मरीज नहीं, लाभार्थी समझो”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने जब ‘नलम कक्कुम स्टालिन’ नामक राज्यव्यापी स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की, तो ये महज़ एक सरकारी योजना नहीं रही — ये एक मिशन बन गया। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि अस्पताल में आने वाला हर इंसान सिर्फ एक मरीज नहीं है, बल्कि वो सरकार की योजनाओं का हकदार है, एक लाभार्थी है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ दवा देना नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना है। स्टालिन ने भावुक होकर बताया कि हाल ही में उन्हें खुद चक्कर आने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था, लेकिन वे अस्पताल के बेड पर भी जनता के कामों से जुड़े रहे। “मुझे लोगों से मिलना, उनकी सेवा करना ही स्वस्थ करता है,” उन्होंने कहा।

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इस अभियान की पहुंच केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगी। पूरे राज्य में 1,256 स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे, खासतौर पर उन इलाकों में जहां पहुंच सबसे कठिन है—गांव, पहाड़, आदिवासी क्षेत्र। हर शिविर में 200 मेडिकल स्टाफ तैनात होंगे और जांच होगी—डायबिटीज, हाई बीपी, टीबी, कैंसर, मानसिक रोग, और भी बहुत कुछ। गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग, दिव्यांग, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर लोग प्राथमिकता में होंगे। खास बात ये है कि हर मरीज की मेडिकल रिपोर्ट डिजिटली सेव की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी अस्पताल में यह इतिहास काम आ सके। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की— “इन शिविरों को हल्के में न लें। यह सिर्फ जांच नहीं, आपके बेहतर जीवन की दिशा में एक मजबूत कदम है।”

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