कौशाम्बी : ताजिया,मेहंदी और झूले आदि के फूलों को अकीदतमंदों ने पूरे जनपद सहित चायल तहसील के थाना कोखराज क्षेत्र के भरवारी खलीलाबाद के कर्बला में दफन किया गया अपर पुलिस अधीक्षक एवं एडीएम न्यायिक की सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिलीं। इस दौरान राजस्व विभाग सिओ सिराथू भरवारी चौकी इंचार्ज के साथ साथ शिवांग सिपाही सुमित एवं शासन प्रशासन की लगातार पैनी नज़र ताजिया जुलूस पर बनी रही।मोहर्रम की दसवीं तारीख को इमाम हुसैन और उनके जांबाज साथियों को विदाई दी गई।इमामबाड़ों से निकले ताजिया, मेहंदी और झूले आदि के फूलों को अकीदतमंदों ने कर्बला में दफन किया। अंजुमानों ने जंजीर, कमा और हाथों से मातम कर जंगे कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अकीदत के फूल कर्बला में दफन किए गए।मोहर्रम के महीने में गांव से लेकर शहर तक ताजिए नजर आते हैं। कौशाम्बी में रविवार को अलग-अलग स्थानों से मोहर्रम की दसवीं का जुलूस निकाला गया।अलविदा अलविदा या हुसैन अलविदा की सदा पर मातम करते आंसू बहाते अजादार इमामबाड़ों पर रखे ताज़िये लेकर कर्बला पहुंचे।
भरवारी खलीलाबाद ।यहां पर लोगों ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम उनके साथियों की याद में मरसिए पढ़े। और न्याजो नजर दिलाई। जगह- जगह जलपान की व्यवस्था की गई थी।ताजिया देखने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के अलावा अन्य शहरों के लोग भी आए हुए थे।ढोल-नगाड़ों की थाप पर बच्चों और युवाओं ने इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। गमगीन माहौल में ताजियों को सुपुर्द ए खाक भरवारी कर्बला मे किया गया मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। रमजान के बाद इस्लाम में मोहर्रम का खास स्थान होता है।मुस्लिम समुदाय यौम-ए-आशूरा के 10वें दिन को मोहर्रम का जुलूस निकाल कर शहादत मनाता है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के छोटे नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हो गए थे। इसलिए इस दिन को शहादत के रूप में मनाते हैं।
भरवारी खलीलाबाद में नम आंखों से कर्बला में दफन हुए ताजियों के फूल,शासन प्रशासन की दुरुस्त व्यवस्था..






