Modern School की 40वीं Cognito Exhibition – थीम: “Celebrating Mistakes”
आमतौर पर स्कूलों में बच्चों को सिखाया जाता है कि गलती मत करो, लेकिन यहाँ उल्टा सिखाया जा रहा है – गलती करो, खुल कर करो, और उसी गलती से सीखो।
यही है इस साल की Cognito की आत्मा।
इस Exhibition में क्या खास है?
ये सिर्फ एक science exhibition नहीं है। यहाँ हर प्रोजेक्ट के पीछे एक कहानी है – पहले कैसे फेल हुआ, फिर क्या सुधारा, और आखिर में क्या सीखा।
बच्चों ने Science, Technology और Innovation को सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि ट्रायल-एंड-एरर से समझा है।
जैसे:
- Science में: वो मॉडल जो पहली बार में फट गया, दूसरी बार लीक हो गया, और तीसरी बार में परफेक्ट काम किया।
- Technology में: रोबोटिक्स और कोडिंग प्रोजेक्ट्स जहाँ एक सेमीकोलन की गलती से पूरा कोड फेल, और उसी गलती को ढूंढना ही सबसे बड़ी लर्निंग बन गया।
- Innovation में: वेस्ट मटेरियल से बने ऐसे आइडियाज जो पहली बार में बेकार लगे, पर उसी में सुधार करके कुछ नया बन गया।
यहाँ जजमेंट नहीं है, नंबर नहीं है। यहाँ हर बच्चे को अपनी सोच रखने, खुल कर प्रयोग करने और ये कहने की आज़ादी है कि “हाँ, मैं यहाँ गलत था।”
‘गलतियों का जश्न’ सीखने को कैसे बदल रहा है?
- डर खत्म, जिज्ञासा शुरू: जब गलती पर डांट नहीं पड़ेगी, तो बच्चा सवाल पूछने से डरेगा नहीं।
- Problem-Solving की असली ट्रेनिंग: असली लाइफ में सक्सेस एक बार में नहीं मिलती। ये exhibition बच्चों को सिखा रही है कि फेल होना प्रोसेस का हिस्सा है।
- Creativity को पंख: परफेक्ट बनने के प्रेशर से निकल कर बच्चे अब कुछ भी नया ट्राई करने को तैयार हैं।
सच में, Modern School, अलीगंज ने 40वें साल में एक नया बेंचमार्क सेट किया है। ये दिखाता है कि एजुकेशन सिर्फ सही जवाब रटना नहीं, बल्कि गलत जवाबों से सही रास्ता ढूंढना भी है।











