बलिया जनपद के रसड़ा की 195 वर्ष प्राचीन श्रीरामलीला में रविवार को नौवें दिन रावण-विभिषण संवाद, रामेश्वर की स्थापना, रावण-अंगद संवाद एवं चार फाटक की लड़ाई प्रसंग का बड़े ही मार्मिक एवं भावपूर्ण अभिनय कर कलाकारों ने सभी को भाव-विह्वल कर दिया। सीता का पता चलने पर श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान सहित किष्किंधा के वानर, भालू श्रीराम के साथ लंका पर चढ़ाई कर दिया। समुंद्र द्वारा रास्ता न देने पर श्रीराम द्वारा वाण का संधान व समुंद्र के माध्यम से नल-नील के बारे में जानकारी देने पर पुल बनता है। साथ ही रामेश्वर में भगवान शिव की स्थापना होती है और सेना लंका में उतर जाती है। लंका पहुंचकर सीता को लाने के लिए श्रीराम ने दूत के रूप में अंगद को रावण के दरबार में भेजते हैं। अंगद ने रावण को काफी समझाया किंतु हठी रावण ने उनकी एक न सुनी। इस दरम्यान रावण द्वारा अपने सभी चार फाटकों पर गहरा व अभेद किलाबंदी करा रखी थी जिसको श्रीराम की सेना ध्वस्त कर दिया। चार फाटक का महासंग्राम देखकर दर्शक पूरी तरह रोमांचित हो उठे और जय श्रीराम के जयघोष करने लगे।









