नई दिल्ली: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहकर संबोधित करने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के पुराने वीडियो को साझा करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दिपके का आरोप है कि पुलिस गैंगस्टरों के प्रति जिस तरह का शिष्टाचार दिखाती है, वैसा व्यवहार छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ भी होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूर्वी दिल्ली के तत्कालीन डीसीपी अभिषेक धानिया का एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में आया है। इसमें वह लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र करते हुए ‘लॉरेंस बिश्नोई साहब’ कहते सुनाई देते हैं। यह वीडियो अगस्त 2025 के आखिर का बताया जा रहा है, जो अब फिर वायरल हो रहा है।
इस वीडियो को साझा करते हुए अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुलिस के रवैये पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस गैंगस्टरों के लिए इतना सम्मान दिखाती है, काश इसका दस प्रतिशत शिष्टाचार भी उन छात्रों और कार्यकर्ताओं के लिए दिखाया जाता, जो केवल विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
दिपके ने एक अन्य पोस्ट में भी पुलिस की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस को वास्तविक अपराधियों पर ध्यान देना चाहिए।
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
इस पुराने वीडियो के दोबारा सामने आने की एक वजह मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना भी है। पुलिस के अनुसार, 18 अक्टूबर को अभिनेता की कार पर तीन से चार राउंड फायर किए गए। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस के बाएं हाथ में गोली लगी। एक अन्य व्यक्ति के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक संदेश सामने आया, जिसमें कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। हालांकि, इस दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि होना बाकी है। मुंबई पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान करने की कोशिश में जुटी है।
क्या दिल्ली पुलिस ने दी सफाई?
इस विवाद पर सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, डीसीपी अभिषेक धानिया ने ‘साहब’ कहने को अनजाने में हुई जुबान की गलती बताया। उन्होंने अपने एक हालिया वरिष्ठ अधिकारी ओमबीर बिश्नोई से मुलाकात का संदर्भ दिया, जिससे नामों को लेकर भ्रम होने की बात कही गई। इसलिए इस संबोधन को जानबूझकर गैंगस्टर के प्रति सम्मान दिखाने का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।
अब उठ रहे हैं ये सवाल
अभिजीत दिपके की इस टिप्पणी ने पुलिस की भाषा, अपराधियों के प्रति उसके व्यवहार और प्रदर्शनकारियों के साथ किए जाने वाले बर्ताव को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किया गया एक संबोधन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त है, या फिर पूरे संदर्भ को समझना जरूरी है?
फिलहाल, यह विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले में सामने आए तथ्यों और पुलिस के स्पष्टीकरण को साथ रखकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।






