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3.06 करोड़ की जीएसटी चोरी में फिर सामने आया प्रशांत गुप्ता का नाम, पहले भी जा चुका है जेल!

फर्जी फर्म खुलवाने के लिए आधार-पैन कार्ड लेने का आरोप, अमन कश्यप की गिरफ्तारी के बाद प्रशांत गुप्ता की भूमिका पर जांच तेज, जीएसटी धोखाधड़ी के अन्य मामलों में भी पुलिस को तलाश

बरेली, 16 अक्टूबर 2026। बरेली में फर्जी फर्म के जरिए करीब 3 करोड़ 6 लाख रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में एक बार फिर प्रशांत गुप्ता का नाम सामने आया है। इज्जतनगर पुलिस और जीएसटी एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार अमन कश्यप ने पूछताछ के दौरान प्रशांत गुप्ता पर फर्म खुलवाने के लिए दस्तावेज लेने और इसके बदले रुपये देने का वादा करने का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, प्रशांत गुप्ता पहले भी जीएसटी धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। अन्य मुकदमों में भी उसकी भूमिका की जांच और तलाश जारी है।

अमन कश्यप की गिरफ्तारी से प्रशांत गुप्ता का नाम आया सामने

इज्जतनगर पुलिस और जीएसटी एसआईटी की टीम ने 15 अक्टूबर की रात करीब 11:10 बजे बिहारीपुर सिविल लाइंस स्थित आवास से अमन कश्यप पुत्र राजेश कश्यप को गिरफ्तार किया। आरोपी मेसर्स जागेश्वर ट्रेडर्स के माध्यम से कथित फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास ऑन करने के मामले में वांछित था।

पुलिस पूछताछ में अमन ने बताया कि उसकी दोस्ती सचिन कुमार और अरुण कुमार से थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रशांत गुप्ता से हुई थी। अमन के अनुसार, प्रशांत गुप्ता ने फर्म खुलवाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो लिए थे।

55 हजार रुपये देने का वादा, बाद में संपर्क बंद करने का आरोप

अमन कश्यप ने पुलिस को बताया कि फर्म खुलवाने के बदले उसे और अरुण कुमार को 55 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी। शुरुआत में उन्हें कुछ रकम मिलती रही, लेकिन बाद में कथित तौर पर प्रशांत गुप्ता ने फोन उठाना बंद कर दिया।

अमन के बयान के अनुसार, अरुण कुमार के खिलाफ आयकर विभाग का नोटिस आने के बाद वे लोग परेशान हो गए और छिपने लगे। अब पुलिस इन बयानों की सत्यता और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पहले भी जीएसटी धोखाधड़ी में जेल जा चुका है प्रशांत गुप्ता

पुलिस के मुताबिक, प्रशांत गुप्ता का नाम इससे पहले भी जीएसटी धोखाधड़ी के एक मामले में सामने आ चुका है। उस मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और वह जेल जा चुका है।

अब 3.06 करोड़ रुपये की कथित कर चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी के बयान में भी प्रशांत गुप्ता का नाम आने से उसकी भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस के अनुसार, अन्य मुकदमों में भी उसकी तलाश और जांच जारी है।

हालांकि, इस मामले में प्रशांत गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

जिस पते पर फर्म दिखाई, वहां नहीं मिला कारोबार

राज्य कर विभाग के उपायुक्त, खंड-08 बरेली की लिखित शिकायत पर इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, मेसर्स जागेश्वर ट्रेडर्स के नाम से फर्जी बिलिंग कर बोगस आईटीसी का लाभ लिया गया और अन्य व्यापारियों को भी आईटीसी पास ऑन की गई।

विभागीय जांच में फर्म का घोषित व्यापार स्थल मौल्या मार्केट, छोटी बिहार, पीलीभीत बाईपास पर अस्तित्व में नहीं मिला। विभाग ने इस मामले में करीब 3.06 करोड़ रुपये की कर चोरी का आरोप लगाया है।

प्रशांत गुप्ता की भूमिका को लेकर कई सवाल

गिरफ्तार आरोपी के बयान के बाद जांच में यह स्पष्ट करना अहम होगा कि फर्म खुलवाने के लिए दस्तावेज किस उद्देश्य से लिए गए थे, फर्म के जरिए कथित बिलिंग कौन कर रहा था और आईटीसी का लाभ किन व्यापारियों तक पहुंचा।

इसके अलावा फर्म के बैंक खातों, लेनदेन और दस्तावेजों की जांच से संबंधित लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकती है।

जीएसटी एसआईटी की जांच जारी

इज्जतनगर पुलिस और जीएसटी एसआईटी की टीम मामले की विवेचना कर रही है। गिरफ्तार अमन कश्यप के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम पहलू यह है कि पहले जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुके प्रशांत गुप्ता का नाम अब करोड़ों रुपये की कथित कर चोरी के एक अन्य मामले में सामने आया है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस फर्जी फर्म के संचालन और कथित आईटीसी धोखाधड़ी में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।

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