नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन 25 अक्टूबर को और तेज हो गया। छात्र पिछले करीब दो सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर तीन सांसदों के खिलाफ कथित अनधिकृत प्रवेश के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
इमरान मसूद समेत तीन सांसदों पर FIR
दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि सांसद छात्र आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से दाखिल हुए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है।
2006 से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव
छात्रों की मुख्य मांग जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ की बहाली और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करना है। विश्वविद्यालय में आखिरी बार 2005 में छात्र संघ चुनाव हुए थे और 2006 में निर्वाचित छात्र संघ को भंग कर दिया गया था। इसके बाद से विश्वविद्यालय स्तर पर चुनाव नहीं हुए हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्र संघ के जरिए वे हॉस्टल, लाइब्रेरी, पेयजल, कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक समस्याओं को प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रख सकते हैं। छात्र आंदोलन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं, सुरक्षा बढ़ाई गई
लगातार बढ़ते तनाव और परिसर में टकराव की घटनाओं के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले आदेश तक कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का फैसला किया है। प्रशासन ने छात्रों को परिसर में आने से बचने की सलाह दी है और विश्वविद्यालय के गेट तथा लाइब्रेरी बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
प्रशासन ने बनाई समिति, लेकिन छात्रों की मांग बरकरार
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए समिति गठित की है। प्रशासन के मुताबिक, समिति को पुराने घटनाक्रम, संबंधित नियमों और छात्र संघ चुनाव से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करना है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र समिति बनाने के साथ-साथ मौजूदा शैक्षणिक सत्र में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने की मांग पर कायम हैं। वे अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों को हटाने की मांग भी कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
जामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। एक ओर प्रशासन समिति के जरिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग कर रहे हैं। तीन सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से विवाद को नया राजनीतिक आयाम मिला है। अब आगे की स्थिति पुलिस जांच, प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत तथा चुनाव बहाली पर लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगी।





