प्रताप अस्पताल पर शव रोकने और तीमारदार को कथित रूप से बांधकर रखने का आरोप, जातिसूचक गाली देने की भी शिकायत
बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र के मिनी बाईपास स्थित प्रताप अस्पताल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सड़क हादसे में घायल बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद योजना के तहत इलाज नहीं करने, रुपये मांगने, शव रोकने और एक तीमारदार को कथित रूप से जबरन अस्पताल में रोककर रखने का आरोप लगाया है। मामले में जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पीड़ित पक्ष ने थाना इज्जतनगर में लिखित शिकायत देकर FIR दर्ज करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
सड़क हादसे के बाद अस्पताल में कराया था भर्ती
शिकायतकर्ता सचिन सागर के मुताबिक, 18 सितंबर की सुबह उनकी दादी सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। हादसे के बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए मिनी बाईपास स्थित प्रताप अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कराया गया।
परिजनों का कहना है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड था। अस्पताल में कार्ड दिखाकर आयुष्मान योजना के तहत उपचार करने का अनुरोध किया गया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल की ओर से योजना के तहत इलाज करने से इनकार करते हुए तत्काल रुपये जमा करने का दबाव बनाया गया।
दोपहर में मौत, इसके बाद ₹22 हजार मांगने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, इलाज के दौरान दोपहर करीब एक बजे बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे ₹22 हजार जमा कराने को कहा। आरोप है कि रुपये जमा नहीं करने पर शव देने से भी इनकार किया गया।
परिवार का कहना है कि बुजुर्ग महिला की मौत के कारण वे पहले से सदमे में थे और इसी दौरान रुपये जमा कराने को लेकर उन पर दबाव बनाया गया।
तीमारदार को रोकने और कथित रूप से बांधने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक मृतका के एक तीमारदार को अस्पताल में कथित रूप से जबरन रोककर रखने का है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तीमारदार को अस्पताल परिसर से बाहर नहीं जाने दिया गया और कथित रूप से बांधकर रखा गया।
आरोप है कि उस पर परिवार से रुपये मंगवाने के लिए दबाव बनाया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है, ताकि घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सके।
जाति पूछकर गाली देने का भी लगाया आरोप
शिकायतकर्ता ने अस्पताल के मैनेजर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कथित तौर पर उसकी जाति पूछी गई और इसके बाद जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अभद्रता तथा गाली-गलौज की गई। धमकी देने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पीड़ित पक्ष चाहता है कि पुलिस मामले की जांच कर आरोपों की सत्यता स्पष्ट करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस पहुंची, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
परिजनों के मुताबिक, मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची। इसके बाद मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस के पहुंचने के बाद भी एक तीमारदार को कुछ समय तक अस्पताल में रोके रखा गया।
अस्पताल से बाहर आने के बाद परिजन थाना इज्जतनगर पहुंचे और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दी।
CCTV और आयुष्मान रिकॉर्ड की जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने पुलिस से FIR दर्ज करने के साथ अस्पताल की CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है। साथ ही आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज से संबंधित रिकॉर्ड, अस्पताल के बिल और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी की गई है।
परिजनों ने तीमारदार को कथित रूप से रोकने और बांधने तथा जातिसूचक गाली-गलौज के आरोपों की भी अलग से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष आना बाकी
मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता और मृतका के परिजनों के हैं। खबर लिखे जाने तक प्रताप अस्पताल के डॉक्टर अथवा प्रबंधन से संपर्क नहीं हो सका था। आयुष्मान योजना के तहत इलाज से इनकार समेत अन्य आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






