भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर अपने 13 साल के लंबे करियर पर विराम लगा दिया है। 6 नवंबर 2026 को शमी ने सोशल मीडिया के जरिए अपने संन्यास का ऐलान किया। लेकिन उनके इस फैसले के पीछे की कहानी अब सामने आ रही है। सबसे बड़ा खुलासा उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने किया है। उनके मुताबिक, शमी करीब एक साल पहले ही टेस्ट क्रिकेट छोड़ना चाहते थे, लेकिन परिवार और कोच ने उन्हें कुछ और समय इंतजार करने के लिए कहा था। India Today+1
दरअसल, इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह नहीं मिलने के बाद शमी के मन में संन्यास का विचार आया था। इसके बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस और प्रदर्शन से वापसी की कोशिश जारी रखी। 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने 37 विकेट हासिल किए, लेकिन इसके बाद भी उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में मौका नहीं मिला। न्यूजीलैंड सीरीज के लिए चयन नहीं होने के बाद उन्हें लगा कि अब टीम में वापसी की उम्मीद बेहद कम है। इसके बाद उन्होंने संन्यास का फैसला कर लिया। India Today+1
वहीं, शमी के संन्यास के बाद बंगाल के कोच लक्ष्मी रतन शुक्ला का गुस्सा भी सामने आया है। उन्होंने मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर पर निशाना साधते हुए कहा कि शमी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, इसके बावजूद उन्हें मौका नहीं दिया गया। शुक्ला ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अगरकर के रवैये की आलोचना की। बता दें कि मोहम्मद शमी ने 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट हासिल किए हैं। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बावजूद वह वनडे और अन्य प्रारूपों में खेलना जारी रख सकते हैं। India Today+1





