सिंधु पैलेस कॉलोनी में फ्लैट खरीदने वाले परिवार ने लगाया आर्थिक शोषण का आरोप, मिशन तिरंगा ट्रस्ट ने दी आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
बरेली। थाना बारादरी क्षेत्र की सिंधु पैलेस कॉलोनी में फ्लैट खरीदने के नाम पर 20 लाख रुपये देने के बावजूद करीब नौ वर्षों से बैनामा नहीं कराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परमानंद देवनानी ने बिल्डर प्रकाश ऐलानी पर वादाखिलाफी, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि पूरी रकम लेने और फ्लैट पर कब्जा देने के बावजूद बिल्डर अब तक संपत्ति का बैनामा कराने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं, अब कथित तौर पर 58 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समाधान न होने पर पीड़ित परिवार ने प्रेसवार्ता आयोजित कर न्याय की गुहार लगाई है।
20 लाख में तय हुआ था फ्लैट का सौदा
रविवार को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान मिशन तिरंगा ट्रस्ट के राष्ट्रीय संयोजक विनोद रघुवंशी, परमानंद देवनानी और ज्योति देवनानी ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब नौ वर्ष पूर्व सिंधु पैलेस कॉलोनी में एक फ्लैट खरीदने के लिए बिल्डर प्रकाश ऐलानी से 20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।
पीड़ित परिवार के अनुसार, तय समझौते के तहत बिल्डर को पूरी धनराशि दे दी गई थी। इसके बाद फ्लैट पर कब्जा भी मिल गया, लेकिन संपत्ति का कानूनी बैनामा आज तक नहीं कराया गया। परिवार का आरोप है कि पिछले नौ वर्षों से लगातार बिल्डर से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है।
अब 40 लाख बाजार भाव और 18 लाख शुल्क के नाम पर मांगने का आरोप
पीड़ित परमानंद देवनानी ने आरोप लगाया कि बिल्डर अब पुराने समझौते को दरकिनार करते हुए फ्लैट की वर्तमान बाजार कीमत के नाम पर 40 लाख रुपये अतिरिक्त मांग रहा है। इसके अलावा बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और नगर निगम के विभिन्न शुल्कों के नाम पर 18 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस प्रकार पहले 20 लाख रुपये लेने के बावजूद अब कथित तौर पर 58 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। पीड़ित परिवार का सवाल है कि जब नौ वर्ष पहले निर्धारित कीमत का भुगतान कर दिया गया था, तो अब अतिरिक्त धनराशि मांगने का क्या औचित्य है?
परिवार ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर संपत्ति का बैनामा कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जांच में रकम लेने की बात स्वीकार करने का दावा
प्रेसवार्ता में विनोद रघुवंशी ने दावा किया कि मामले की शिकायत के बाद हुई जांच के दौरान बिल्डर ने फ्लैट का सौदा होने और 20 लाख रुपये प्राप्त करने की बात स्वीकार की थी। इसके बावजूद बैनामा नहीं कराया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को लंबे समय से परेशान किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई लगाकर संपत्ति खरीदता है, तो निर्धारित समझौते के अनुसार उसे कानूनी स्वामित्व मिलना चाहिए।
रघुवंशी ने कहा कि इस तरह के मामलों में प्रशासन को गंभीरता दिखाते हुए जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी खरीदार को वर्षों तक अपनी ही खरीदी हुई संपत्ति के अधिकार के लिए भटकना न पड़े।
कार्रवाई नहीं हुई तो एसएसपी से मिलकर एफआईआर की मांग
मिशन तिरंगा ट्रस्ट के राष्ट्रीय संयोजक विनोद रघुवंशी ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला, तो संगठन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और गिरफ्तारी की मांग करेगा।
उन्होंने कहा कि संगठन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री के समक्ष मामला उठाया जाएगा। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय की शरण लेने का विकल्प भी अपनाया जाएगा।
नौ साल से न्याय की प्रतीक्षा में परिवार
पीड़ित परिवार का कहना है कि फ्लैट पर कब्जा होने के बावजूद बैनामा न होने से संपत्ति के कानूनी स्वामित्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने समझौते, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और बिल्डर द्वारा मांगी जा रही अतिरिक्त धनराशि की जांच कराई जाए।
प्रेसवार्ता में मिशन तिरंगा ट्रस्ट के पदाधिकारी विनोद रघुवंशी, पीड़ित परमानंद देवनानी, ज्योति देवनानी और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
फिलहाल बिल्डर प्रकाश ऐलानी का पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों और कथित जांच में दिए गए बयान की स्वतंत्र पुष्टि भी शेष है। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन इस नौ वर्ष पुराने संपत्ति विवाद में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिल पाती है।






