इस्राइल के चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों पर कतर का जवाब, कहा- राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश
कतर ने इस्राइल के चुनाव में हस्तक्षेप और अरब पार्टियों को प्रभावित करने के लिए धन देने के आरोपों को खारिज किया है। कतर का कहना है कि इस्राइल के कुछ नेता अपनी घरेलू राजनीतिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए उसे निशाना बना रहे हैं। वहीं, इस्राइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट इन आरोपों की जांच कर रही है। इस विवाद के बीच चुनावी राजनीति और नई सरकार के गठन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
कतर ने आरोपों को बताया निराधार
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इस्राइली चुनाव में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार किया। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया है कि कतर ने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने या अरब राजनीतिक दलों को समर्थन देने के लिए धन मुहैया कराया।
अल-अंसारी के मुताबिक, इस्राइल के कुछ नेता और उनसे जुड़े मीडिया संस्थान कतर को अपने देश के राजनीतिक विवादों में घसीट रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को बेतुका और खतरनाक बताते हुए कहा कि कतर को इस्राइली नेताओं की राजनीतिक विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
इस्राइली नेताओं पर कतर का पलटवार
माजिद अल-अंसारी ने कहा कि इस्राइल के अलग-अलग राजनीतिक गुट समय-समय पर कतर पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कभी कतर पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को प्रभावित करने, कभी वामपंथी राजनीतिक गुटों और अब अरब मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इन सभी दावों को सही मान लिया जाए, तो ऐसा प्रतीत होगा मानो कतर इस्राइल की पूरी राजनीति को नियंत्रित कर रहा हो।
कतर के प्रवक्ता ने इस्राइली नेताओं को सलाह दी कि वे बाहरी देशों पर आरोप लगाने के बजाय अपने मतदाताओं की समस्याओं, लोगों के जीवन स्तर और क्षेत्र में हुए नुकसान जैसे मुद्दों पर ध्यान दें। कतर का आरोप है कि उसे घरेलू राजनीतिक परेशानियों से ध्यान हटाने के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
शिन बेट की जांच से क्या सामने आएगा?
इस्राइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को चुनाव में कतर के कथित प्रभाव और विदेशी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एजेंसी को एक सप्ताह के भीतर जांच के निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस विवाद को भूकंप जैसी स्थिति बताते हुए आरोप लगाया कि विदेशी पक्षों ने अरब पार्टियों के पक्ष में चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि यहूदी राष्ट्रवादी दलों को राअम और जॉइंट लिस्ट के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए।
हालांकि, कतर ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। फिलहाल जांच जारी है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप हुआ था या नहीं।
फलस्तीन के मुद्दे पर कतर का रुख बरकरार
कतर ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद के बावजूद उसकी कूटनीतिक और मानवीय गतिविधियां जारी रहेंगी। माजिद अल-अंसारी ने कहा कि कतर क्षेत्रीय संघर्षों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा और फलस्तीनी लोगों का समर्थन भी जारी रखेगा।
कतर ने इस्राइल में बनने वाली भावी सरकार से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों का पालन करने की अपील की। साथ ही, उसने फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फलस्तीनी देश की स्थापना का समर्थन दोहराया, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलम हो।
कतर के अनुसार, वह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए संघर्षों का समाधान तलाशने और स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम करता रहेगा।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
इस पूरे विवाद में अब शिन बेट की जांच अहम मानी जा रही है। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेशी हस्तक्षेप और धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों के समर्थन में कोई सबूत सामने आते हैं या नहीं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इस विवाद का इस्राइल की राजनीतिक स्थिति और नई सरकार के गठन पर कितना असर पड़ता है।
फिलहाल कतर ने आरोपों को खारिज किया है, जबकि इस्राइल में मामले की जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी भी पक्ष के दावों को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।





