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मानदेय बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा और काम के बढ़ते बोझ को कम करने की मांग, सरकार से न्याय की उम्मीद

कोरबा, छत्तीसगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं। विभागीय योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इन महिलाओं का कहना है कि उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की देखभाल, कुपोषण दूर करने, बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी जुटाने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम योगदान देती हैं। इसके साथ ही उन्हें विभागीय रिकॉर्ड तैयार करने, ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।

काम का बोझ बढ़ा, लेकिन मानदेय में सुधार की मांग बरकरार

कार्यकर्ताओं का कहना है कि समय के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारियां बढ़ती गई हैं। बच्चों के पोषण से लेकर महिलाओं के स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने का दायित्व भी इन्हीं के कंधों पर है। इसके बावजूद मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान की जरूरत बनी हुई है।

उनका कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं समाज के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। छोटे बच्चों की देखभाल और उनके पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए वे कई बार अपने परिवार की जरूरतों और व्यक्तिगत परेशानियों को भी पीछे छोड़ देती हैं। ऐसे में उनके काम का उचित मूल्यांकन और सम्मान मिलना आवश्यक है।

योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका

महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), पोषण संबंधी कार्यक्रमों और महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से जुड़ी गतिविधियों के क्रियान्वयन में भी इनका योगदान रहता है। इसके अतिरिक्त हितग्राहियों को जानकारी देना, जरूरी दस्तावेज जुटाने में सहयोग करना और विभागीय निर्देशों के अनुसार कार्य करना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्य पूरे करने की बात आती है, तब उनसे पूरी तत्परता के साथ काम लिया जाता है। लेकिन जब उनके मानदेय, सुविधाओं और समस्याओं के समाधान की बात आती है, तब उन्हें अपेक्षित ध्यान नहीं मिल पाता। इससे उनके मनोबल पर भी असर पड़ता है।

5 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में हड़ताल

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच की ओर से 5 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज उठाई गई है। 27 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर में एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया था। इस आंदोलन के माध्यम से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

उनकी प्रमुख अपेक्षाओं में मानदेय में उचित वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा, कार्यभार से जुड़ी समस्याओं का समाधान तथा उनके योगदान के अनुरूप सम्मान शामिल हैं। उनका मानना है कि केवल जिम्मेदारियां बढ़ाने से व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, बल्कि इन जिम्मेदारियों को निभाने वाली महिलाओं की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है।

मेहनत का सम्मान और समस्याओं का समाधान जरूरी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि वे बच्चों के बेहतर भविष्य और महिलाओं के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही हैं। इसलिए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। सरकार और संबंधित विभाग को उनके प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर लंबित मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।

अब देखना होगा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की 5 सूत्रीय मांगों पर शासन कब तक सकारात्मक निर्णय लेता है। इन महिलाओं को उम्मीद है कि उनकी मेहनत, जिम्मेदारी और समाज के प्रति योगदान को उचित सम्मान मिलेगा तथा उनकी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट, करतला।

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