नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद को लेकर विवाद गहरा गया है। दिल्ली रेस क्लब की जमीन पर पहले हुई कार्रवाई के बाद अब प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को खाली कराने का नोटिस जारी किए जाने से मामला चर्चा में है। मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद हारून ने आशंका जताई है कि परिसर को खाली कराने के बाद मस्जिद पर भी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, मस्जिद को गिराने की कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इमाम का दावा—बिजली-पानी की सप्लाई बंद
मस्जिद के इमाम के मुताबिक, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने परिसर को छह दिनों के भीतर खाली करने का नोटिस दिया है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई है और नमाजियों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। इन परिस्थितियों के चलते मस्जिद के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सरकारी जमीन बनाम वक्फ संपत्ति का विवाद
इस मामले में सबसे अहम सवाल जमीन की कानूनी स्थिति को लेकर है। L&DO के मुताबिक, संबंधित परिसर सरकारी जमीन पर स्थित है और इसे अनधिकृत कब्जे के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, मस्जिद के पक्षकारों का कहना है कि यह एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है, जिसका उल्लेख 1977 के दिल्ली गजट और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की हेरिटेज सूची में मिलता है।
जमीयत और ओवैसी ने उठाई आवाज
मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने 19 अक्टूबर को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने और बिजली-पानी की सुविधा बहाल करने की मांग की। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को मामले में हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया।
वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से मस्जिद के मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।
फिलहाल विवाद का केंद्र मस्जिद की जमीन का स्वामित्व, उसके ऐतिहासिक दर्जे और जारी नोटिस की वैधता है। अब संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है।






