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करतला के सजापानी में मादा हाथी ने दिया शावक को जन्म, वन विभाग अलर्ट; ड्रोन से निगरानी और गांवों में मुनादी जारी, मां और शावक की सुरक्षा के लिए वन विभाग सतर्क

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट

कोरबा//कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट लबेद के ग्राम सजापानी में मंगलवार सुबह हाथियों के झुंड के बीच एक नन्हे हाथी का जन्म हुआ। सूचना मिलते ही वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी। मां और शावक की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही है। आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों से जंगल की ओर नहीं जाने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।

वन विभाग के अनुसार, सुबह करीब छह बजे गश्त और हाथी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को शावक के जन्म की जानकारी मिली। इसके बाद विभागीय अमला मौके पर पहुंचा और हालात का आकलन कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल हाथियों के झुंड को बिना किसी बाधा के प्राकृतिक वातावरण में रहने देना और ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाना प्राथमिकता है।

गश्त के दौरान मिली शावक के जन्म की सूचना

बीट लबेद के ग्राम सजापानी के आसपास का जंगल हाथियों की आवाजाही वाला क्षेत्र है। नियमित गश्त के दौरान कर्मचारियों ने झुंड में नवजात शावक की मौजूदगी देखी। इसके बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई और ग्रामीणों को सतर्क किया गया। नवजात शावक शुरुआती दिनों में अपनी मां और झुंड पर निर्भर रहता है। इस दौरान हाथी सामान्य से अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। किसी व्यक्ति के झुंड के करीब पहुंचने पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए वन विभाग ने लोगों से जंगल और उसके आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा है।

मां और शावक की सुरक्षा पर जोर

हाथियों के झुंड में नवजात की सुरक्षा में मां के साथ अन्य हाथी भी भूमिका निभाते हैं। ऐसे समय में भीड़, तेज आवाज, पीछा करने या नजदीक जाने से स्थिति बिगड़ सकती है। ग्रामीणों और अन्य लोगों से शावक को देखने के लिए जंगल में नहीं जाने की अपील की गई है। हाथियों के पास जाकर फोटो या वीडियो बनाना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है। मां हाथी अपने बच्चे को लेकर आक्रामक प्रतिक्रिया दे सकती है। इसलिए शावक के पास जाने, उसे छूने, रास्ता रोकने या झुंड को घेरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
ड्रोन से निगरानी

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। घने जंगल और झाड़ियों के कारण जमीन से निगरानी करना कठिन होता है, ऐसे में ड्रोन से झुंड की स्थिति का आकलन करने में मदद मिल रही है। हालांकि, विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि ड्रोन संचालन से हाथियों और नवजात शावक को परेशानी न हो। वनकर्मी मौके पर मौजूद रहकर गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को समय पर चेतावनी दे रहे हैं।

गांवों में मुनादी, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के गांवों और प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से बचने और हाथियों के दिखाई देने पर उनसे दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। कई ग्रामीण जलाऊ लकड़ी, पत्ते, लघु वनोपज या अन्य जरूरतों के लिए जंगल जाते हैं। ऐसे में हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में जाने से पहले वन विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है। हाथियों का झुंड दिखने पर उन्हें भगाने या उनके आसपास भीड़ लगाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहकर वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है। रात के समय भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। ग्रामीणों को हाथियों की संभावित आवाजाही वाले रास्तों, खेतों और जंगल से जुड़े मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचना चाहिए।

प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप से बचने की सलाह
मादा हाथी के शावक को जन्म देने के बाद मां और बच्चे को शांत वातावरण की जरूरत होती है। नवजात हाथी शुरुआती दिनों में मां के करीब रहता है और झुंड के साथ तालमेल बनाने में समय लेता है। इस दौरान मानवीय हस्तक्षेप से बचना जरूरी है। भीड़, तेज आवाज या वाहनों की आवाजाही से हाथी असहज हो सकते हैं और उनकी प्रतिक्रिया अप्रत्याशित हो सकती है। इसलिए लोगों को उनके व्यवहार का अनुमान लगाकर करीब जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। वन विभाग ने ग्रामीणों से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से रहने देने की अपील की है।

मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए समन्वय जरूरी

कोरबा के वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही के दौरान मानव और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग और ग्रामीणों के बीच समन्वय जरूरी है। समय पर सूचना, मुनादी और निगरानी से जोखिम कम किया जा सकता है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि हाथियों की गतिविधियों से जुड़ी अपुष्ट जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। ऐसी सूचनाओं के कारण लोग हाथियों को देखने के लिए मौके पर पहुंच सकते हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील हो सकती है। किसी भी गतिविधि की जानकारी सीधे वन विभाग को देने की सलाह दी गई है।

वन विभाग की अपील—निर्देशों का पालन करें

कोरबा वनमंडल ने ग्रामीणों से जंगल की ओर जाने से बचने, हाथियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखने और विभागीय निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विभागीय अमला क्षेत्र में तैनात है, जबकि ड्रोन और मैदानी निगरानी के माध्यम से झुंड की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य मां हाथी और नवजात शावक को सुरक्षित रखना तथा ग्रामीणों को किसी भी अनहोनी से बचाना है। इसके लिए जनसहयोग आवश्यक है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे उत्सुकतावश जंगल में न जाएं, हाथियों को परेशान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना वनकर्मियों को दें।

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