बरेली में दर्दनाक सड़क हादसे के बाद मानवता को झकझोर देने वाला आरोप, पिता की मौत से परिवार में कोहराम, एक बेटे की हालत गंभीर; घायल प्रेमपाल ने निजी एंबुलेंस से जुड़े विपिन और सचिन पर लगाए रुपये निकालने के आरोप
बरेली। जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पिता की दवा दिलाने जा रहे दो बेटों की मोटरसाइकिल को अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 60 वर्षीय पिता की मौत हो गई, जबकि दोनों बेटे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुखद घटना के बीच घायल बेटे ने निजी एंबुलेंस कर्मियों पर उसकी जेब से तीन हजार रुपये निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि हादसे के बाद वह घायल और अर्धबेहोशी की हालत में था, इसी दौरान उसकी जेब से रुपये निकाल लिए गए।
पिता की दवा दिलाने जा रहे थे दोनों बेटे, रास्ते में काल बनकर आया अज्ञात वाहन
जानकारी के अनुसार, बरेली के थाना कैंट क्षेत्र के गांव लखौरा निवासी 60 वर्षीय रघुवीर पुत्र दयाल अपने बेटों प्रेमपाल और कल्लू के साथ मोटरसाइकिल से दवा लेने जा रहे थे। तीनों भमोरा क्षेत्र में बल्लिया की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान थाना भमोरा क्षेत्र के हर्रामपुरा गांव के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मोटरसाइकिल सवार पिता और दोनों बेटे सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। अचानक हुए हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
अस्पताल पहुंचते ही पिता को मृत घोषित किया, बेटे की हालत नाजुक
हादसे के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने रघुवीर को मृत घोषित कर दिया। पिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
वहीं, हादसे में घायल बेटे कल्लू की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूसरे बेटे प्रेमपाल को भी चोटें आई हैं। पुलिस ने मृतक रघुवीर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घायल प्रेमपाल का गंभीर आरोप, बेहोशी का फायदा उठाकर जेब से निकाले तीन हजार रुपये
इस दर्दनाक हादसे के बीच सबसे चौंकाने वाला आरोप निजी एंबुलेंस कर्मियों पर लगा है। घायल प्रेमपाल ने बताया कि दुर्घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल था और उसे पूरी तरह होश नहीं था।
प्रेमपाल का आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर निजी एंबुलेंस से जुड़े लोगों ने उसकी जेब से तीन हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ित के मुताबिक, उसे बाद में रुपये गायब होने की जानकारी हुई।
प्रेमपाल ने बताया कि एंबुलेंस से जुड़े दो लोगों के नाम विपिन और सचिन बताए गए हैं। हालांकि, इन दोनों व्यक्तियों की भूमिका और रुपये निकालने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पिता की मौत का गम, भाई अस्पताल में भर्ती और ऊपर से रुपये चोरी होने का आरोप
एक तरफ प्रेमपाल अपने पिता को हमेशा के लिए खो चुका है, दूसरी तरफ उसका भाई कल्लू अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में उसकी जेब से रुपये निकाले जाने का आरोप बेहद गंभीर है।
सवाल उठता है कि यदि आरोप सही हैं तो क्या अब सड़क हादसों में घायल लोगों की मजबूरी और बेबसी का भी फायदा उठाया जाने लगा है? जिन लोगों से संकट के समय घायलों की मदद की उम्मीद की जाती है, उन्हीं पर इस तरह के आरोप लगना चिंताजनक है।
एंबुलेंस कर्मियों की भूमिका की जांच जरूरी, पुलिस कार्रवाई पर निगाहें
इस मामले में निजी एंबुलेंस कर्मियों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। संबंधित एंबुलेंस की पहचान, उसमें मौजूद कर्मचारियों और घायल के अस्पताल पहुंचने तक के घटनाक्रम की पड़ताल से सच्चाई सामने आ सकती है।
साथ ही पुलिस के सामने अज्ञात वाहन की पहचान कर हादसे के जिम्मेदार चालक का पता लगाने की चुनौती भी है।
फिलहाल एंबुलेंस कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज होने या किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। आरोपित पक्ष का बयान भी उपलब्ध नहीं है।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की सुरक्षा और निजी एंबुलेंस सेवाओं की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करती है। अब देखना होगा कि जांच में प्रेमपाल के आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलता है।





