SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां का वोटिंग अधिकार को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। हैदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के जरिए लाखों नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाता है और उन्हें अपने ही देश में बिना वोटिंग अधिकार वाला ‘दोयम दर्जे का नागरिक’ बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया मनमानी मानी जाएगी।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को वोट के अधिकार के आधार पर दो वर्गों में नहीं बांटता। उन्होंने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट में दर्ज किसी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए, सिवाय मृत मतदाता के मामले के।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वोट देने का अधिकार नागरिक की पहचान से अलग नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के मूल सिद्धांतों को प्रभावित करती है। हालांकि, जस्टिस भुइयां ने अपने संबोधन में किसी विशेष संस्था या SIR प्रक्रिया का सीधे नाम नहीं लिया।





